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मद्रासी कालोनी केनिवासी तीस साल से पी रहे आश्वासनों का घूंट

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झांसी। वार्ड नंबर 50 डड़ियापुरा महानगर का ऐसा क्षेत्र है, जहां पानी की समस्या नई नहीं है। 30 साल से अधिक का समय बीत गया, लेकिन पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ। जब परेशान लोग पानी की मांग को लेकर रास्ता जाम करते हैं तो नेता और अधिकारी वहां पहुंचकर मोहल्ले वालों को ‘आश्वासनों का घूंट’ पिला देते हैं और मामला रफा- दफा हो जाता है। कुछ ऐसा ही हाल यहां की मद्रासी कॉलोनी का है। चूकिं यहां रहने वाले लोग रोज कमाते-खाते हैं। उनका कोई राजनीतिक रसूख नहीं है, इसलिए उनकी बातों को हल्के में लिया जाता है। यही कारण है कि तीस साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यहां पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। परेशान लोगों ने बीते रोज जाम लगाया तो मंगलवार को वहां टैंकरों से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई।
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महानगर के बाहरी छोर पर बसी मद्रासी कॉलोनी में करीब पांच हजार लोग निवास करते हैं। यहां पर पानी की पाइपलाइन नहीं है। जहां पर है, वहां अवैध कनेक्शन हैं, जिससे पानी आगे नहीं जाता है।ं एक परिवार में तीन-तीन अवैध नल कनेक्शन हैं। इनकी ओर न तो जलसंस्थान का ध्यान जाता है, न जिम्मेदार अधिकारियों और न नेताओं का। क्योंकि नेता यदि अवैध कनेक्शन हटाने की बात करेंगे तो उन्हें वोट बैंक खिसकने का खतरा रहता है। अधिकारी इसलिए चुप्पी साधे रहते हैं कि उन्हें अवैध कनेक्शन के बदले ‘नजराना’ मिल जाता है। इससे जनता को परेशान होना पड़ रहा है।
सोमवार को लोगों ने जाम लगाया तो मंगलवार को टैंकर शुरू हो गए और छह चक्कर लगाए जा रहे हैं। आसपास तीन हैंडपंप हैं, इसमें से एक में ही पानी आ रहा है, लेकिन यह आबादी से दूर लगा है। इसलिए हैंडपंप भी पानी की कमी दूर करने में नाकाम हैं। उधर, ट्यूबवेल की मोटर खराब होने के बाद उसे बदलवा दिया गया है।
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यहां पर भी है परेशानी
इस क्षेत्र से जुड़े सत्यम कॉलोनी, अन्नपूर्णा कॉलोनी, राय कॉलोनी, अमान का बगीचा समेत आसपास के क्षेत्रों में लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है।
धड़ल्ले से बिक रहा पानी
सत्यम कॉलोनी समेत अन्य क्षेत्रों में कुछ लोगों के यहां बोरिंग में भरपूर पानी है। इस कारण यह लोग धड़ल्ले से पानी बेच रहे हैं। कोई तीन सौ रुपये महीना तो कोई पांच सौ रुपये महीना पानी बेचता है। लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर पानी बेचने वाले लोग एक साल में लाखों रुपये कमाते हैं। यही नहीं, इन लोगों के पास पानी बेचने का कोई लाइसेंस नहीं है और न इनके पास ऐसी कोई अनुमति है। बावजूद इसके अवैध तरीके से पानी बेचने वालों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
लोगों की परेशानी से किसी को कोई मतलब नहीं है। सब बड़े- बड़े दावे कर रहे हैं लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। पिछले तीस साल से यहां पानी की परेशानी है।
- आशा देवी
चुनाव के दौरान सभी दलों के नेता पानी की व्यवस्था सही कराने का आश्वासन दे जाते हैं और चुनाव के बाद सब भूल जाते हैं। कई साल से केवल आश्वासन मिल रहे हैं।
- अजीत
अब तो नेताओं की बातों का भरोसा नहीं होता, क्योंकि वे जो कहते हैं। वह करते नहीं हैं। यदि उनकी बातें सही होतीं तो अब तक यहां के लोग पानी के लिए परेशान नहीं होते।
- अनीता रायकवार
जब जाम लगा था तो भाजपा और सपा के नेता बड़ी- बड़ी बातें कर रहे थे। लेकिन गर्मियों में उनका कोई पता नहीं चला, जब हम लोग बूंद- बूंद पानी के लिए परेशान थे।
- ममता
सब काम छोड़कर टैंकर का इंतजार कर रहे हैं। घर में दो दिन से पानी नहीं है। पीने के लिए पानी हैंडपंप से लाए थे। टैंकर आ जाए और पानी भर जाए, तब जान में जान आएगी।
- सुनीता
पानी के लिए बहुत परेशानी है। टैंकर चल गए तो थोड़ी सी राहत है, लेकिन नेताओं की बातों का अब भरोसा नहीं रहा। वह जो कुछ कहते हैं, वह कभी नहीं होता। अधिकारी भी ध्यान नहीं देते।
- मधु
एनओसी न मिलने से काम अटका
महानगर पाइप पेयजल योजना के अंतर्गत डाली जा रही पानी की पाइपलाइन का काम छह महीने से अटका पड़ा है। इसकी वजह जलनिगम अपने पाइप राजकीय नारायण बाग उद्यान से निकालना चाहता है। जलनिगम ने विभाग से पत्राचार किया, लेकिन उद्यान विभाग से अनापत्ति नहीं मिली है। इस कारण पाइपलाइन को टंकी से जोड़ने का काम अधूरा पड़ा है।
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ट्यूबवेल की मोटर सही हो गई है। उसे चेक भी कर लिया गया है। बुधवार से जलापूर्ति होगी।
- आरएसएस बादलीबाल
अधिशासी अभियंता, जल संस्थान
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