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लंबी-लंबी कतार, आधी से ज्यादा दवाएं नहीं, कैसे कराएं उपचार

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झांसी। पहले तो एक रुपये का पर्चा बनवाकर घंटों लाइन में खड़े रहकर डॉक्टर को दिखाने की जद्दोजहद। फिर दवा काउंटर पर भी लंबी-लंबी कतार। बाद में चंद दवाएं ही मिल पा रही हैं। ये हाल है जिला अस्पताल का। यूपी मेडिकल कॉरपोरेशन के वेयर हाउस से दवाओं की सप्लाई न हो पाने की वजह अस्पताल में दवाओं को टोटा हो गया है। बताया गया कि अस्पताल में 60 फीसदी दवाएं खत्म हो चुकी हैं।
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इन दिनों जिला अस्पताल में उल्टी, डायबिटीज, एंटी एलर्जिक, हाइपरटेंशन की अधिकांश दवाएं खत्म हो गई हैं। इसके अलावा मांग के अनुसार बहुत कम मात्रा में आईबी फ्लूड मिल पा रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से यूपी मेडिकल कारपोरेशन से दवाओं की मांग की गई है। मगर दवाएं पर्याप्त मात्रा में मिल नहीं पा रही हैं। रोजाना दवा काउंटर पर कम दवा मिलने पर मरीजों की अस्पताल स्टाफ के साथ बहस होती है। अस्पताल में पूरी दवाएं न मिल पाने की वजह से मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। बताया गया कि शासन ने नौ मई को अस्पताल के लिए बजट जारी कर दिया था। मगर पोर्टल पर बजट अपलोड नहीं हो पाया है। इस कारण अस्पताल प्रशासन जरूरी दवाओं की लोकल खरीद भी नहीं कर पा रहा है।
एनेस्थीसिया की कोई भी दवा नहीं
जिला अस्पताल में रोजाना तीन से चार ऑर्थोपेडिक और जनरल सर्जरी विभाग में ऑपरेशन होते रहते हैं। सर्जरी से पहले मरीजों को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन देकर बेहोश किया जाता है। मगर अस्पताल में एक भी एनेस्थीसिया की दवा नहीं होने के चलते मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही है।
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ये दवाएं हो गईं खत्म
बताया गया कि जिला अस्पताल में उल्टी की दवा ऑन्डेंसिट्रोन, मेटाक्लोप्रामाइड के इंजेक्शन और टैबलेट नहीं हैं। इसके अलावा एंटीबायोटिक सेफ्ट्रायक्सोन, पैरासिटामोल इंजेक्शन, एंटी एलर्जिक सिट्राजिन टैबलेट व सिरप, हाइपरटेंशन की दवा डेपिन आदि दवाएं नहीं हैं।
अस्पताल में जो-जो दवाएं नहीं हैं, उनकी यूपी मेडिकल कॉरपोरेशन के वेयर हाउस से दवाओं की मांग की गई है। प्रशासन के अधिकारियों ने भी पत्र लिखा है। जल्द ही दवाएं मिलने की संभावना है। - डॉ. आरके सचान, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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