झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में कोई काले झंडे न दिखा सके। इसलिए नेताओं को नजरबंद कर लिया गया। इसमें समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल रहे। नजरबंद सभी लोग पुलिस के पहरे में रहे।
शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के बेटे गौरव जैन नई दिल्ली से शताब्दी एक्सप्रेस से झांसी आए। स्टेशन पर उन्होंने प्रधानमंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद उनके घर पर कड़ा पहरा लगा दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री पहले से ही नजरबंद थे। उनकी छत पर पुलिस का पहरा बैठा दिया गया, ताकि कोई काले गुब्बारे या काले झंडे न दिखा सके। इसी तरह आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष कैलाश कुशवाहा और उपाध्यक्ष अनिरुद्ध प्रताप सिंह को भी नजरबंद कर लिया गया। समाजवादी पार्टी के छात्र सभा इकाई के अभिषेक यादव और समाजवादी पार्टी की प्रदेश सचिव दीपाली रायकवार को नजरबंद कर पुलिस का पहरा बढ़ा दिया गया।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव दीपक शिवहरे को नजरबंद कर लिया गया, क्योंकि पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि अगर लखीमपुर खीरी के किसानाें अथवा महिलाओं की सुरक्षा को इतनी पुलिस लगाई जाती तो ज्यादा अच्छा रहता। इसके अलावा कांग्रेस नेता जितेंद्र भदौरिया, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के प्रदेश महासचिव स्वदेश यादव, अलग बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग कर रहे बुंदेलखंड निर्माण सेना के अध्यक्ष भानु सहाय को नजरबंद कर लिया। पत्रकाराें के उत्पीड़न के खिलाफ ज्ञापन देने और कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन के विरोध में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का काली पट्टी बांधकर कवरेज करने की चेतावनी देने पर पत्रकार शशांक त्रिपाठी को नजरबंद किया गया। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के राष्ट्रीय संयोजक अभिषेक प्रताप सिंह को भी नजरबंद कर किया गया। वह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति और फीस संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। प्रधानमंत्री के वापस जाने के बाद सभी को छोड़ दिया गया।