लक्ष्मी तालाब की सफाई के दौरान जगह- जगह हुए गड्ढों में पानी भरने से काम धीमा पड़ गया है। मोटर पंप और नाली बनाकर पानी निकाला जा रहा है। इससे काम पूरा होने में देरी होती जा रही है। काम को पूरा करने के लिए जल निगम ने दिसंबर 2018 का लक्ष्य तय किया था, लेकिन समय दो महीने आगे निकल गया है।
अक्तूबर 2018 से लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम दोबारा शुरू किया गया है। इस बार जिओ मिलर कंपनी के साथ पांच ठेकेदार सफाई का काम कर रहे हैं। तालाब की 40 फीसदी से ज्यादा सफाई कर दी गई है। जलकुंभी को हटा दिया गया है। तालाब के बीच अब सफाई करने में परेशानी शुरू हो गई है। एक, दलदल से कीचड़ निकालने में जेसीबी मशीन फंस रही है। दूसरा, जगह- जगह गड्ढों में पानी भर गया है। इससे काम धीमा पड़ गया है।
जलनिगम के अभियंता अभियंता नरेंद्र कुमार ने बताया कि मोटर पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है। तेजी से काम हो, इसकी पूरी कोशिश की जा रही है। दो महीने में सफाई का काम पूरा हो जाएगा।
मालूम हो कि लक्ष्मी तालाब की सफाई पर छह करोड़ रुपये खर्च होेने हैं, इसमें जिओ मिलर कंपनी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का ठेका कुल 34 करोड़ रुपये में मिला है। इसमें से पांच प्रतिशत हिस्सा सफाई मद में खर्च करना है। ढाई लाख क्यूबिक मीटर सफाई होनी है।
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नारायण बाग के पास स्थित लक्ष्मी ताल को सुंदर बनाने पर 54 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें साठ फीसदी पैसा (32.50 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार व चालीस फीसदी (21.50 करोड़ रुपये) राज्य सरकार को देना है। योजना 2015 में शुरू हुई थी, जिसमें 25 करोड़ रुपये का बजट अभी तक मिल चुका है। दिल्ली की जिओ मिलर कंपनी को 34 करोड़ रुपये का ठेका जल शोधन वाटर टैंक (एसटीपी) व अन्य निर्माण काम के लिए दिया गया है।