कृष्णलीलाओं का गवाह है बुंदेलखंड खबर के साथ--- ललितपुर में स्थित मुचकुंद गुफा
- फोटो : REPORTERS
झांसी। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का गवाह बुंदेलखंड भी है। ललितपुर जिले के जंगल में स्थित मुचकुंद गुफा में उन्होंने कालयवन को भस्म करवाया था। इसी गुफा के पास ही बेतवा नदी के तट पर भगवान रणछोड़ का बेहद प्राचीन मंदिर है। ललितपुर के जंगलों में ही कहा जाता है पांडवों ने अपना अज्ञातवास बिताया था। उनसे मिलने स्वयं गोवर्धन गिरधारी आए थे। पांडव वन में आज भी पांडवों द्वारा स्थापित शिवलिंग है।
मान्यता है कि वैदिक युग में बुंदेलखंड दंडकारण्य क्षेत्र रहा है। प्राचीन भारत में आर्यों की चेदी शाखा के निवास होने पर यह भूभाग चेदी राज्य के नाम से मशहूर रहा। वैदिक साहित्य के अनुसार प्राचीन काल में चेदी महाजनपद, वर्तमान में चंदेरी के राजा शिशुपाल थे। धार्मिक विद्वानों के अनुसार शिशुपाल भगवान श्री कृष्ण का मौसेरा भाई था। लेकिन वह श्री कृष्ण से ईर्ष्या करता था। हालांकि श्रीकृष्ण ने अपनी मौसी को वचन दिया था कि वह शिशुपाल की 99 गलतियों को क्षमा करेंगे। लेकिन पांडवों के
राजसूय यज्ञ में शिशुपाल ने भगवान को 99 बार अपशब्द कहा। 100 वी गलती पर भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया। भागवत पुराण और हरिवंश पुराण में वर्णित है कि मगध के शासक जरासंध ने मथुरा पर हमला करने के लिए कालयवन को भेजा था, जो महादेव के वरदान से अजेय था। महादेव के वरदान का सम्मान रखते हुए श्रीकृष्ण युद्ध भूमि को छोड़कर ललितपुर के धौरा के पास विंध्याचल पर्वत की गुफा में आकर छुप गए। इस गुफा में काफी लंबे समय से मुचकुंद ऋषि
सो रहे थे। उन्हें ईश्वर का वरदान था कि जो भी उन्हें नींद से जगाएगा वह जलकर भस्म हो जाएगा। भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पितांबरी ओढ़नी गुफा में सो रहे मुचकुंद ऋषि को उड़ा दी और छिप गए। कालयवन ने मुचकुंद ऋषि को श्रीकृष्ण समझा और उन्हें जगा दिया। इसके बाद कालयवन भस्म हो गया। आज भी इस गुफा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इसी गुफा से 1 किलोमीटर दूर भगवान रणछोड़ का मंदिर है। जो प्राचीन स्थापत्य कला को मोहकता से पेश करता है।
बुंदेलखंड खासकर ललितपुर में भगवान श्री कृष्ण से जुड़े प्रसिद्ध स्थल हैं। यह बुंदेलखंड में कृष्ण धाम के रूप में विकसित किए जा सकते हैं। इन स्थलों के प्रचार प्रसार से देश विदेश के कृष्ण भक्त यहां आकर्षित होंगे। पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग द्वारा इन स्थलों पर विकास कार्य कराए जा रहे हैं। एसके दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी।