झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर का लगातार दूसरे दिन भी कार्य बहिष्कार जारी रहा। झांसी समेत दूरदराज से आए मरीज इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे। सुबह काउंटर खुलने पर 170 ओपीडी पर्चे बन गए, मगर जब जूनियर डॉक्टरों को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने काउंटर बंद करा दिए। सोमवार को 1200 से ज्यादा मरीजों को बिना इलाज कराए लौटना पड़ा।
नीट काउंसलिंग में हो रही देरी के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने शनिवार को इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी विभागीय कार्यों का बहिष्कार कर दिया था। डॉक्टरों का कहना है कि शासन की ओर से प्रवेश प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। छह-सात माह में विभिन्न विभागों में रेजीडेंट डॉक्टरों की संख्या काफी कम हो गई है। एडमिट मरीजों का भार बचे रेजीडेंट डाक्टरों पर पड़ रहा है। ऐसी परिस्थिति में वार्ड, ओटी और ओपीडी में काम करने में दिक्कत हो रही है। सरकार को जल्द नीट काउंसलिंग कराने का फैसला करना चाहिए। मांग पूरी न होने के चलते सोमवार को भी जूनियर चिकित्सकों ने कार्य बहिष्कार जारी रखा। हालांकि, सुबह-सुबह काउंटर खोलकर कर्मचारियों ने पर्चे बनाने शुरू कर दिए थे। 170 पर्चे बन भी गए। मगर जब जेआर को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने काउंटर बंद करा दिए। सोमवार को सबसे ज्यादा मरीजों की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में रोगियों को दिक्कत झेलनी पड़ी। घंटों खड़े रहकर रोगी पर्चा काउंटर खुलने का इंतजार करते रहे।
पांच-पांच सौ किराया खर्च करके आए रोगी
बुंदेलखंड का बड़ा चिकित्सा संस्थान होने की वजह से झांसी मेडिकल कॉलेज में झांसी, चित्रकूट मंडल के सभी जिलों और मध्य प्रदेश से भी कई मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। मरीजों ने बताया कि 500-500 रुपये किराया खर्च करके इलाज कराने के लिए आए। पता चला कि पर्चे ही नहीं बन रहे हैं। ऐसे में किराया और समय दोनों बर्बाद हो गया।
सेटिंग वाले नर्सिंगहोम में ले जाता रहा कर्मचारी
इलाज ठप होने का पूरा फायदा मेडिकल कॉलेज का एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी उठाता रहा। वो दिनभर मरीजों के पास जा-जाकर अपने सेटिंग वाले अस्पताल में ले जाता रहा। कहता रहा कि वहां चलो इलाज का पूरा इंतजाम करा देंगे। ज्यादा पैसे भी नहीं लगेंगे। कुछ मरीजों को तो वो अपनी काली रंग की बाइक पर भी बैठकर नर्सिंगहोम तक छोड़ने के लिए गया।
ये बोले मरीज
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काउंटर बंद होने से पर्चा नहीं बन सका। बिना पर्चे के डॉक्टर भी ओपीडी में नहीं देख रहे हैं। अब बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ रहा है। - राजेंद्र, निवाड़ी।
पत्नी का इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज आया हूं। मगर पर्चे ही नहीं बन रहे हैं। अब निजी अस्पताल में जाकर इलाज कराऊंगा। - उत्तम, भिंड।
बच्चे के पैर में तेज दर्द होने के कारण डॉक्टर को दिखाने के लिए आया था। ओपीडी में बिना पर्चे डॉक्टर ने नहीं देखा। अब लौट रहा हूं। - कांशीराम, महोबा।
ससुर को दिखाने आई हूं। 500 रुपये किराया खर्च हो गया और इलाज भी नहीं हुआ। कॉलेज प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करानी चाहिए। - मदीना, महोबा।
ये बोले पदाधिकारी
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नीट काउंसलिंग में लगातार हो रही देरी के चलते बाकी जेआर पर काम का बोझ बढ़ गया है। सरकार को फास्ट ट्रैक काउंसलिंग करानी चाहिए। - डॉ. निखिल मिश्रा, जूडा अध्यक्ष।
काउंसलिंग कराने को लेकर कई बार रिमाइंडर दिया जाता रहा, मगर कुछ नहीं हुआ। अब कार्य बहिष्कार कर रहे हैं लेकिन इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं। - डॉ. आजाद, जूडा सचिव।