झांसी। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम और बाजार में गेहूं का मूल्य ज्यादा होने पर सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद प्रभावित हुई है। अगर पिछले सालों की खरीद का रिकॉर्ड देखें तो जहां एक दिन में जितनी खरीद होती थी, उतनी खरीद पूरे दो माह में हुई है। अब तक महज 14 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद प्रभावित होने से अब झांसी में भी गेहूं का संकट गहराता जा रहा है। भारतीय खाद्य निगम के गोदाम लगभग खाली हैं। इस समय गोदामों में सिर्फ तीन हजार मीट्रिक टन गेहूं ही बचा है, ऐसे में गरीबों को बांटने वाले राशन के लिए बाहर से गेहूं मंगवाना पड़ रहा है। जबकि पिछले सालों में यहां इतनी खरीद हो जाती थी, जिससे बुंदेलखंड से गेहूं बाहर भेजा जाता था।
गेहूं की फसल आने पर समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा गेहूं की खरीद की जाती है। इस बार सरकार द्वारा गेहूं क्रय केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 तय किया गया है। लेकिन बाजार में गेहूं के अधिक रेट मिलने के कारण क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने में किसान रुचि नहीं ले रहे हैं।
संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) द्वारा हर साल गेहूं खरीदने के बाद भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में रखवा दिया जाता है। यहां से सरकारी राशन क ी दुकानों पर भेज दिया जाता है। लेकिन इस बार गेहूं की खरीद कम होने पर गोदाम लगभग खाली हैं। राशन बांटने के लिए अब बाहर से रैक मंगवाई जा रही हैं।
ये हैं गोदाम
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औद्योगिक क्षेत्र (ग्वालियर रोड) का गोदाम
क्षमता 20 हजार मीट्रिक टन
गेहूं - 1000 मीट्रिक टन
भोजला मंडी
क्षमता 5000 मीट्रिक टन
गेहूं - 500 मीट्रिक टन
डगरवाहा स्थित गोदाम
क्षमता 30 हजार मीट्रिक टन
गेहूं- 1500 मीट्रिक टन
गेहूं की एक रैक मई में आई थी, जून में लगातार रैक मंगवाई जा रही हैं, जिससे आगे भी गेहूं का पर्याप्त स्टॉक बना रहे। - पुष्पेंद्र सिंह, मंडल प्रबंधक एफसीआई