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झांसी के सराफा कारोबारी ने ओरछा में जहर खाकर दी जान

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झांसी। शुक्रवार को एक सराफा कारोबारी ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इससे परिवार में कोहराम मच गया। मृतक के पास से सुइसाइड नोट में मौत का जिम्मेदार चार लोगों को ठहराया गया है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मामले की पड़ताल शुरू कर दी गई है।
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गंदीगर का टपरा निवासी सराफा कारोबारी सुधीर सोनी उर्फ सुध्धी (47) की बांस वाली गली में श्री रामराजा ज्वैलर्स के नाम से सोने-चांदी के आभूषणों की दुकान है। इसके अलावा वे एक निजी बैंक के लिए सोने की वैल्यूएशन का काम करते थे। दुकान का संचालन वे अपने भाई प्रदीप कुमार सोनी के साथ करते थे। शुक्रवार को सुबह तकरीबन 10 बजे वे ये कहकर घर से निकले थे कि पहले दीक्षित बाग स्थित शंकर जी के मंदिर जाएंगे और उसके बाद दुकान पर। लेकिन, दोपहर 12.30 बजे तक वे दुकान पर नहीं पहुंचे, तो उनके भाई ने उन्हें फोन किया। इस पर उन्होंने बताया कि कुछ काम है और थोड़ी देर में आ जाएंगे। इसके तकरीबन एक घंटे पर कारोबारी ने अपनी पत्नी मीना सोनी को फोन किया और बताया कि वो ओरछा में है और कुछ खा लिया है, वो मरने वाला है। जानकारी होने पर भाई तत्काल ओरछा के लिए रवाना हो गया। रास्ते में ही भाई एक ऑटो में पुलिस के साथ मिल गया। उसकी हालत बिगड़ी हुई थी। वे आनन-फानन में उसे महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज लेकर भागे। यहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इससे परिवार में कोहराम मच गया। परिजन व सराफा कारोबारी मेडिकल पहुंच गए। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
मृतक के पास से एक सुइसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें अपनी मौत का जिम्मेदार चार लोगों को बताया है। इनमें दो सराफा कारोबारी और दो निजी बैंक के कर्मचारी हैं, जिसके लिए वो वैल्यूएशन का काम करता था। पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
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भाई, परिवार का ख्याल रखना
झांसी। मृतक ने सुइसाइड नोट में लिखा है कि मुझे दुख है कि मैं परिवार के लिए कुछ नहीं कर पाया। प्रदीप भाईसाहब मेरे परिवार का ख्याल रखना। सुइसाइड नोट पर कई जगह कटिंग भी की गई है। इसके अलावा लिखावट स्पष्ट न होने की वजह से लिखा हुआ स्पष्ट तौर पर समझ में भी नहीं आ रहा है।
गलत वैल्यूएशन होने से थे परेशान: मीना
झांसी। मृतक की पत्नी मीना सोनी ने बताया कि सुधीर सोनी एक निजी बैंक के लिए सोने की वैल्यूएशन का काम करते थे। उनकी रिपोर्ट के आधार पर सोना गिरवीं रखकर बैंक कर्ज देता था। एक मामले में 30-40 लाख के सोने की गलत वैल्यूएशन हो गई थी। ये गड़बड़ी दो बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से हुई थी। उन्होंने सोने की जांच में प्रयुक्त होने वाली तेजाब में धोखे से पानी मिला दिया था। इसकी जानकारी बैंक को भी दी गई थी। इससे वे बेहद परेशान रहने लगे थे, जिसके चलते उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।
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