फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मनोनीत ‘माननीय’ बनने की तैयारी

Tue, 26 Dec 2017 02:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूराो
विज्ञापन
प्रशासन - फोटो : demo
विज्ञापन
शहर की नई सरकार बन चुकी है। अब मनोनीत पार्षद बनकर बैक डोर से नगर निगम के सदन में पहुंचने की तैयारी शुरू हो गई है। निगम में दस पार्षदों का मनोनयन किया जाना है। इसमें सत्ताधारी दल अपने कार्यकर्ताओं को मनोनीत किए जाने की परंपरा बनी हुई है। यही वजह है कि भाजपा के कार्यकर्ता मनोनयन के लिए सक्रिय हो गए हैं। इनमें भाजपा के वे लोग भी सक्रिय हैं, जो चुनाव हार गए हैं। मनोनयन के लिए दावेदारों ने स्थानीय नेताओं के साथ-साथ लखनऊ के लिए दौड़ लगाना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


नगर निगम या अन्य किसी भी स्थानीय निकाय में मनोनयन के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं है। इसके लिए अहम यह है कि दावेदार की सत्ताधारी दल में पकड़ कितनी मजबूत है। दावेदार के खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा नहीं होना चाहिए। समाजसेवा करने वाला हर शहरी मनोनीत पार्षद बनने की योग्यता रखता है। नगर निगम में दस पार्षद और नगर पालिकाओं में पांच-पांच सभासद और नगर पंचायतों में तीन-तीन सदस्य मनोनीत किए जाने हैं। यह बात तय है कि प्रदेश में जिस दल की सरकार होती है, उसी दल के कार्यकर्ताओं को मनोनीत किया जाता है। प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो तय माना जा रहा है कि झांसी नगर निगम समेत सभी निकायों में भाजपा के कार्यकर्ताओँ को ही मनोनीत किया जाएगा।   

भाजपा सूत्रों के अनुसार महानगर में पार्षदों के मनोनयन के लिए दावेदरों का चयन संगठन के लिए कठिन काम है, क्योंकि निकाय चुनाव के दौरान पार्षद पद के टिकट वितरण में असंतोष थामने के लिए बहुत से कार्यकर्ताओं को यह कहकर शांत किया गया था कि उनको पार्षद मनोनीत करा दिया जाएगा। अभी पार्षद मनोनयन के लिए शासन स्तर से तो कोई सुगबुगाहट नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं। शपथ ग्रहण के एक महीने के अंतराल में पार्षद मनोनयन व सदन की बैैठक कराने का प्रावधान है। ऐसे में माना जा रहा है कि जनवरी तक पार्षदों के मनोनयन की संभावना है।
विज्ञापन



जहां पार्टी का प्रदर्शन खराब, वहां नजर
चुनाव के दौरान जिन वार्डों में पार्टी का खराब प्रदर्शन रहा है, वहां के कार्यकर्ताओं को मनोनीत पार्षद बनने का मौका मिल सकता है, क्योंकि इस बहाने पार्टी उस क्षेत्र में अपने प्रतिनिधि के माध्यम से जनता के बीच उपस्थिति दर्ज कराएगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ऐसे वार्डों के कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर ध्यान दिया जा रहा है।

हारे प्रत्याशियों पर दांव नहीं
जिन वार्डों में प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है, वहां पराजित प्रत्याशी पार्टी के संगठन से लगातार संपर्क में हैं। उन्हें लग रहा है कि मनोनीत पार्षद बनकर वह समाजसेवा बेहतर तरीके से कर सकेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ऐसे कार्यकर्ताओं पर दांव नहीं लगाया जाएगा, जिससे पार्टी की छवि पर असर पड़े।

मनोनीत पार्षद नहीं दे सकते वोट
मनोनीत पार्षदों को नगर निगम कार्यकारिणी की समिति में वोट देने का अधिकार नहीं है। विधान परिषद सदस्य के चुनाव में भी मनोनीत पार्षद वोट नहीं डाल सकते। इन्हें किसी विशेष क्षेत्र का पार्षद नहीं, बल्कि नगर क्षेत्र का पार्षद कहा जाता है। मनोनीत पार्षद शहर के किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सदन में प्रस्ताव रख सकते हैं।

मनोनयन की परंपरा
सदन में सभी क्षेत्रों के लोगों की नुमाइंदगी हो, इसलिए कला, संस्कृति, शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता, कानून विद, चिकित्सा, उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के प्रतिनिधियों को मनोनीत करने की परंपरा है। बदलते राजनीतिक दौर में अब पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को ही महत्व दिया जाने लगा है।


ई चर्चा नहीं
मनोनीत पार्षदों के संबंध में अभी कोई चर्चा नहीं हुई है। जैसे ही पार्टी हाईकमान का निर्देश आएगा, बैठक कर पार्षदों के नाम फाइनल कर लखनऊ भेज दिए जाएंगे।
विज्ञापन

-संजय दुबे, जिलाध्यक्ष, भाजपा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें