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तस्करों ने झांसी में बना रखा था अवैध शराब का गोदाम

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झांसी। शराब के अंतर्राज्यीय तस्करों ने झांसी में अवैध शराब का गोदाम बना रखा था। यहां से वे उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा मध्य प्रदेश और बिहार में अवैध शराब की खेप भेजते थे। तस्कर बेहद शातिराना अंदाज में अपने काम को अंजाम देते थे। हरियाणा से ये शराब अरुणाचल प्रदेश के लिए चलती थी, लेकिन वहां न भेजकर इसे बीच में ही उतार लिया जाता था।
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देश के अरुणाचल प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों में शराब पर टैक्स बहुत कम है। यही वजह है कि देश के अन्य राज्यों के मुकाबले वहां शराब की कीमतें सस्ती हैं। कीमतों में इसी अंतर को ही तस्करों ने कमाई का जरिया बना रखा था। वे हरियाणा और चंडीगढ़ की फैक्टरियों से इंपीरियल ब्लू, ब्लू स्ट्रोक और कैप्टन ब्लू ब्रांडों की शराब अरुणाचल प्रदेश के लिए बनवाते थे। हरियाणा व चंडीगढ़ से ट्रकों में लदकर ये शराब अरुणाचल प्रदेश के लिए निकलती थी, लेकिन वहां पहुंचती नहीं थी। बल्कि, इसे झांसी में सिमरधा में बनाए गए गोदाम में उतार लिया जाता था। यहां से इस शराब को तस्करी कर अलग-अलग गाड़ियों के जरिये मध्य प्रदेश और बिहार भेजा जाता था। पकड़े गए तस्करों को बिहार में खासा नेटवर्क फैला हुआ है। चूंकि, बिहार में शराब बंदी है, ऐसे में वहां इनका माल हाथों हाथ खप जाता था।
शनिवार को पुलिस लाइन में तस्करी के खुलासे की जानकारी एसपी सिटी विवेक त्रिपाठी, एसपी देहात नैपाल सिंह व एसटीएफ के उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह ने दी। अफसरों ने बताया कि ये शराब तस्करी के नेटवर्क की एक कड़ी पकड़ी गई है। अभी पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाना बाकी है। तस्करों को गिरफ्तार करने वाली संयुक्त टीम में एसटीएफ उपाधीक्षक के अलावा मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप, आबकारी अधिकारी प्रमोद कुमार गोयल, सीपरी थाने के प्रभारी निरीक्षक एके सिंह व आबकारी निरीक्षक शिशुपाल सिंह शामिल रहे।
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झाड़ुओं के पीछे छिपाकर रखा था जखीरा
झांसी। अवैध शराब के तस्करों ने पूरी सोची समझी रणनीति के तहत ग्वालियर पर स्थित सिमरधा में चार महीने पहले गोदाम किराये पर लिया था। ये जगह एमपी की सीमा से सटी हुई है। साथ ही फोरलेन हाईवे का चौराहा होने की वजह से देश के किसी भी हिस्से के लिए यहां से आसानी से सड़क मार्ग से निकला जा सकता है। तस्कर गोदाम में शराब को झाड़ुओं के बंडलों के पीछे छुपाकर लगते थे, ताकि किसी को शराब होने की भनक तक न लगे। यही वजह रही कि शराब के गोदाम को आसपास के लोगों में झाड़ू गोदाम के नाम से पहचान है।
अफसरों की सांठगांठ से हो रहा था काम
झांसी। शराब की तस्करी के मामले में अरुणाचल प्रदेश के कुछ अफसरों की सांठगांठ सामने आई है। एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में आबादी के लिहाज से कहीं ज्यादा शराब की डिमांड आ रही थी। इसे लगातार ट्रेस किया जा रहा था। ट्रकों को चेक किए जाने के दौरान संदेह होने पर अरुणाचल के अफसरों से संपर्क साधा जाता था, तो वे भी शराब प्रदेश में आने की बात कह देते थे। इतना ही नहीं, तस्कर शराब की तस्करी के लिए फर्जी कागजात व कूटरचित बिल्टी तक का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद पैंतरा बदलते हुए हरियाणा और चंडीगढ़ की जिन फैक्टरियों से अरुणाचल के लिए शराब निकलती थी, उन पर नजर जमा दी गईं थीं। वहीं से शराब की लदी गाड़ियों को ट्रेस किया जाने लगा था, जिससे अवैध शराब की तस्करी के इस बड़े मामले का खुलासा हुआ।
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