मैराथन की विजेता बबीना के पलींदा गांव की छाया ठाकुर पुत्र रज्जन सिंह रहीं। उन्हें पुरस्कार के तौर पर स्कूटी दी गई। इसके अलावा शीलू यादव, मुस्कान पॉल समेत 25 विजेताओं को स्मार्ट फोन के लिए चिह्नित किया गया है। आयोजक के मुताबिक एक हजार विजेताओं को मेडल और सभी आठ हजार प्रतिभागियों को टी-शर्ट, प्रमाणपत्र बांटे गए।
300 फीट लंबे फ्लैग के साथ हुई एंट्री
मैराथन को लेकर युवतियों, महिलाओं में काफी उत्साह रहा। दौड़ पूरी करने के बाद महिला प्रतिभागियों ने 300 फुट लंबे फ्लैग के साथ मुक्ताकाशी मंच परिसर में एंट्री की। इस दौरान लड़की हूं लड़ सकती हूं के तराने गूंजते रहे। जबरदस्त भीड़ के बीच थीम सांग पर महिला प्रतिभागी झूमती रहीं। प्रतिभागियों ने आयोजकों से जल्द ही प्रियंका गांधी को झांसी बुलाने की अपील की।
प्रियंका गांधी की लोकप्रियता से डरकर प्रदेश सरकार ने लखनऊ में रैली की अनुमति नहीं दी। झांसी में भाजपा नेताओं के इशारे पर आठ हजार की भीड़ में 10-20 लोग भेजकर मोदी-योगी के नारे लगवाए गए। मगर इससे फर्क नहीं पड़ता है। झांसी में ऐतिहासिक रैली हुई है। सारे प्रतिभागी लड़की हूं, लड़ सकती हूं के नारे लगा रहे थे। प्रियंका गांधी के जयकारे कर रहे थे। प्रदीप जैन आदित्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री।
मैराथन में विजेताओं की घोषणा के लिए स्पोर्ट्स ऑफिशियल कमेटी बनाई थी। वो लोग जगह-जगह पर इसकी मॉनीटरिंग कर रहे थे। पूरी मैराथन की वीडियोग्राफी हुई है। डेढ़ घंटे तक सब सही रहा। प्रतिभागियों ने प्रियंका गांधी जिंदाबाद के नोर लगाए। अंत में विपक्षी लोगों ने षड्यंत्र कर अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की। इसके बावजूद मैराथन ऐतिहासिक हुई है। राहुल रिछारिया, आयोजक, कांग्रेस