झांसी। महानगर के डेढ़ सौ व्यापारियों पर 17 करोड़ रुपये की बकायेदारी की वसूली में अब तेजी आएगी। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद बकायेदार व्यापारी जलसंस्थान पहुंचकर भ्रांतियों का समाधान करा रहे हैं। अधिकारी उन्हें शासनादेश के बारे में बता रहे हैं। जवाब सुनकर व्यापारी संतुष्ट होकर जा रहे हैं। अधिकारी ने उम्मीद जताई है कि अब वसूली में तेजी आएगी।
जलसंस्थान ने महानगर के 150 प्रतिष्ठानों की रिकवरी (आरसी) जारी की थी। अप्रैल में जारी हुई इस आरसी को लेकर पहले व्यापारियों ने बैठक कर इसे रुकवाने का प्रयास किया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इससे वसूली पर रोक लग गई, लेकिन पिछले दिनों हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। इसे लेकर व्यापारियों को असमंजस था और वह शासनादेश केवल लखनऊ के संदर्भ में ही मान रहे थे।
जलसंस्थान कार्यालय में पहुंचकर अधिकांश व्यापारी शासनादेश के बारे में जानना चाह रहे हैं। इस पर विभाग का सीधा एक ही कहना है कि उप्र वाटर सप्लाई एवं सीवरेज एक्ट 1975 के अंतर्गत प्रावधान है कि मकान के आसपास सौ मीटर की दूरी पर निकली पाइपलाइन से कनेक्शन लिया गया हो अथवा नहीं, मकान के वार्षिक मूल्यांकन का 12.5 प्रतिशत जलकर लिया जाएगा। इसी आधार पर व्यापारियों की रिकवरी जारी की गई थी। शासनादेश केवल लखनऊ के लिए नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के महानगरों के लिए जारी हुआ है।
शासनादेश में स्पष्ट उल्लेख है। राजस्व वसूली को लेकर शासन गंभीर है। वसूली की लगातार ऑनलाइन मानीटरिंग हो रही है। इसलिए अब जलसंस्थान युद्धस्तर पर बकायेदारों से वसूली करेगा।
- कुलदीप सिंह, महाप्रबंधक
जलसंस्थान