इंटरकॉम की मदद से कैदियों से बात कर रहे परिजन
झांसी। कोरोना काल में जेल में निरुद्ध बंदियों से उनके परिजनों की मुलाकात पर प्रतिबंध लगा हुआ है। बावजूद, तमाम परिजन मिलने की आस के साथ जेल पहुंच जाते हैं। लेकिन उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। ऐसे में अब जेल में इंटरकॉम की व्यवस्था की गई है। परिजन बाहर से ही जेल में निरुद्ध अपने परिचित से इंटरकॉम पर बात कर हालचाल की जानकारी कर लेते हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर से जेल में निरुद्ध बंदी भी दहशत में हैं। हालांकि, जेल में दूसरी लहर का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। लेकिन बंदी अपने परिजनों को लेकर चिंतित रहते हैं। परिजन भी जेल में निरुद्ध बंदी का हालचाल जानना चाहते हैं और मिलाई के लिए यहां पहुंच जाते हैं। लेकिन कोरोना के संक्रमण के खतरे की वजह से मिलाई बंद चल रही हैं। यहां तक कि परिजनों द्वारा लाई जाने वाली खानपान सामग्री भी जेल के भीतर नहीं पहुंच पा रही है। इस परेशानी से काफी हद तक निजात दिलाने के लिए जेल में इंटरकॉम सेवा शुरू की गई है। दो इंटरकॉम सेट जेल के बाहर बूथ में तथा दो अंदर रखे गए हैं। परिजनों द्वारा बात करने की इच्छा जताने पर जेल में निरुद्ध बंदी अंदर स्थित इंटरकॉम बूथ पर बुला लिया जाता है और उनकी आपस में बात करा दी जाती है। ये सेवा निशुल्क रखी गई है। बातचीत के दौरान जेल स्टाफ मौजूद रहता है।
कोरोना काल में जेल में मुलाकात बंद चल रही है। बावजूद, तमाम बंदियों के परिजन मिलने की आस के साथ पहुंच जाते हैं। उनकी इंटरकॉम के जरिये बंदियों से बात करा दी जाती है। ये सेवा नि:शुल्क है। बातचीत के दौरान जेल स्टाफ मौजूद रहता है। - रंग बहादुर पटेल, वरिष्ठ जेल अधीक्षक।