झांसी। शहर में मंडी से बाहर आते ही सब्जियां दोगुनी कीमतों पर बिक रही हैं। टमाटर तो 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है। जिम्मेदार अफसर हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। वहीं, लोग अब एक किलो की जगह पाव भर या फिर आधा किलो ही सब्जियां खरीदकर बिगड़े बजट को संभालने में जुटे हैं।
सब्जियों के दामों पर कोई नियंत्रण न होने की वजह से खाने की थाली लगातार महंगी होती जा रही है। मंडी में अधिकारियों ने प्याज और टमाटर के स्टाल लगा दिए हैं लेकिन शहर की बड़ी आबादी मंडी में सब्जी खरीदने नहीं जाती है। चौराहों, ठेले से फुटकर ही लोग सब्जियां खरीदते हैं। मगर मंडी और बाहर की सब्जी के दामों में तो दोगुने तक का अंतर है। आम जन की भी मांग है कि प्रशासन के अफसर मंडी की तरह शहर के प्रमुख स्थानों पर स्टाल लगाएं। ताकि, लोगों को सस्ती दरों पर सब्जी मिल सके। इन दिनों सबसे महंगा 80 रुपये टमाटर बिक रहा है। इस कारण ज्यादातर लोग पाव भर या फिर आधा किलो ही टमाटर खरीद रहे हैं। वहीं, इस मामले में मंडी सचिव पंकज शर्मा का कहना है कि मंडी परिसर के बाहर उनका विक्रेताओं पर कोई नियंत्रण नहीं है। मंडी में वह स्टॉल लगवाकर फुटकर में रियायती दरों पर सब्जी बिकवा रहे हैं।
सब्जी मंडी का भाव फुटकर भाव
आलू 25 30
प्याज 20 30
टमाटर 40 80
बैगन 20 40
भिंडी 35 40
लौकी 15 30
तुरई 40 60
अरबी 15 30
गाजर 25 35
ये बोली जनता
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फुटकर में सब्जी बहुत महंगी बिक रही है। हर कोई मंडी नहीं जा सकता, इसलिए प्रशासन शहर के प्रमुख स्थानों पर सब्जी के स्टॉल लगवाए। - आशीष यादव।
मंडी में 40 रुपये में टमाटर मिल रहा है तो बाहर 80 में क्यों। सब्जी के दामों में दोगुने तक का अंतर नहीं होना चाहिए। इससे लोग परेशान हैं। - अनिल कुमार।
पहले चार सौ रुपये की सब्जी पांच दिन चलती थी, अब दो-तीन दिन में ही खत्म हो जाती है। महीने में ढाई हजार की तो सब्जी पर ही खर्च होते हैं। - आशीष।
लगातार सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं। फुटकर में तो विक्रेता मनमानी दरों पर सब्जी बेच रहे हैं। इन पर किसी का अंकुश नहीं है। कार्रवाई होनी चाहिए। - हरीश कुमार।