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नयाखेड़ा में 70 फीसदी आबादी बीमार, लोग घरों में ताला लगाकर चले जा रहे

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नयाखेड़ा गांव में बीमारी की खबर में---------अपनी सास विद्यावती के सिर पर पानी की पट्टियां रखकर देखभाल ?
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झांसी। वायरल, डेंगू और मलेरिया की बीमारियों से शहर ही नहीं गांव-गांव तक लोग बीमार पड़े हैं। ऐसा ही एक गांव है रक्सा का नया खेड़ा। यहां पर 70 फीसदी से ज्यादा आबादी बुखार, जुकाम, बदन दर्द से कराह रही है। हाल ये है कि परिवार के परिवार बिस्तर पकड़ लिए हैं। आज तक स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में झांकने तक नहीं पहुंची है। बीमारियों का डर इस कदर है कि कई लोग सुबह अपने घरों में ताला लगाकर कहीं और चले जाते हैं। शाम को लौटते हैं।
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बीमारियों के सीजन में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का ज्यादातर फोकस शहर में है, मगर ग्रामीण इलाकों में हालात बदतर हैं। अमर उजाला की पड़ताल में नयाखेड़ा गांव में इसकी पुष्टि हुई है। कई घरों में तो पूरा परिवार बीमार पड़ा है तो कई लोगों का दो से तीन सप्ताह तक बुखार नहीं उतरा है। गांव की सावित्री ने बताया कि वो पिछले 20 दिनों से बुखार से परेशान हैं। उन्होंने खाना खाना बंद कर दिया है। उनकी बहू कामिनी और आशा और पोती अनुष्का, वर्षा भी बुखार से पीड़ित हैं। सावित्री के पति राम सिंह ने बताया कि दो सप्ताह तक बुखार से तपने के बाद अब वह ठीक हो पाए हैं। गांव के नंदकिशोर और उनका पूरा परिवार भी बुखार की चपेट में है। इसमें पत्नी विद्या, बेटा नरेंद्र और लक्ष्मण शामिल हैं। सिर्फ बहू की तबीयत ठीक है। ऐसे में पूरे परिवार की देखभाल का भार बहू पर आ गया है। वह लगातार परिजनों की सिर पर पट्टी करके बुखार उतारती रहती हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में मच्छरों का भी प्रकोप है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यहां जाकर कभी झांका तक नहीं। न तो लार्वी साइट का छिड़काव हुआ और न कभी स्वास्थ्य शिविर लगा। इससे लोगों में बहुत असंतोष है। उनका कहना है कि उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया गया है। अफसर बड़ी-बड़ी बातें करते रहते हैं मगर जमीनी हकीकत दावों और वादों से बहुत दूर है। ग्रामीणों ने तत्काल स्वास्थ्य शिविर लगाकर बीमारों की जांच और दवाएं देने की मांग की है।
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50 से ज्यादा हो चुके अस्पताल में भर्ती
ग्रामीणों ने बताया कि एक महीने में गांव के 50 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। अभी भी कई लोगों को सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है। इलाज कराने में लोगों का खूब पैसा भी खर्च हो रहा है।
बीमारी का शिकार बच्चे भी, नहीं जा पा रहे स्कूल
गांव की महिलाओं ने बताया कि डेंगू, मलेरिया की कभी जांच नहीं हुई। ऐसे में पता पता नहीं कि वास्तव में कौन सी बीमारी की चपेट में लोग हैं। कई बच्चे भी बीमार पड़े हैं। ऐसे में वह स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित है।
ये बोले ग्रामीण
गांव की 70 फीसदी से ज्यादा आबादी बुखार से कराह रही है। जो लोग बीमारी से बचे हैं, उन्हें डर बैठ गया है। ऐसे में वह सुबह परिवार के साथ कहीं और चले जाते हैं। रात में लौटते हैं। - भरत।
गांव में बीमारी फैले हुए एक महीने से ज्यादा हो गए हैं। आसपास से दवा ले लेते हैं तो असर भी नहीं होता है। बहुत समस्या है। गांव में स्वास्थ्य विभाग का शिविर लगना चाहिए। - रवि कुमार।
पिछले एक महीने में 50 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। अभी भी कई लोगों का इलाज चल रहा है। स्थिति बहुत खराब है। कई परिवारों में ज्यादातर लोग बीमारी पड़े हुए हैं। - राहुल।
घर-घर लोग बीमार हैं। आज तक स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर जांच करने के लिए नहीं आई है। न ही डेंगू, मलेरिया से बचाव के लिए छिड़काव हुआ है। जबकि, मच्छर भी गांव में हैं। - हेमराज।
शुक्रवार को ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर भेजा जाएगा। जांच-पड़ताल कराने के साथ-साथ रक्त पट्टिका भी बनवाई जाएंगी। साथ ही लार्वी साइट का भी छिड़काव होगा। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ।
विकासखंड के अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को गांव में फैली बीमारी के बारे में बताया था। जांच कर इलाज के लिए भी बोला हुआ है। मगर अब तक कोई नहीं आया। - जितेंद्र अहिरवार, प्रधान।
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