झांसी। सत्र 2021-22 की प्रयोगात्मक परीक्षाएं मार्च के प्रथम सप्ताह से आयोजित की जानी है लेकिन बच्चे परेशान हैं कि परीक्षक के सामने लैब में प्रैक्टिकल कैसे करेंगे। छात्र-छात्राओं का कहना है कि कोरोना काल में दो साल तक स्कूल बंद रहने से उन्होंने लैब का मुंह तक नहीं देखा, अब ऐसे में बोर्ड परीक्षा के प्रैक्टिकल कैसे कर पाएंगे। उधर, बच्चों की समस्या को देखते हुए स्कूलों में बैच बनाकर लैब में प्रयोग कराए जा रहे हैं।
प्रयागराज बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई में बोर्ड में 12वीं के छात्र-छात्राओं के लिए बोर्ड प्रैक्टिकल शुरू होने वाले हैं। जबकि बच्चों का कहना है कि कोरोना काल में स्कूल बंद रहे। कक्षाएं भी ऑनलाइन रहीं, ऐसे में वह न तो स्कूल जा पाए न ही उन्होंने लैब में कोई प्रयोग कार्य किया। इधर, प्री-बोर्ड परीक्षाएं प्रारंभ हो गईं। ऐसे में बच्चों के मन में डर हैं कि वे अपनी प्रायोगिक परीक्षा कैसे दे पाएंगे।
बच्चों में विज्ञान की प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर खासा डर बना हुआ है। स्थिति यह है कि दो वर्षों में 10वीं पास करके 11वीं के बाद 12वीं में आए कुछ बच्चों को बीकर और टेस्ट ट्यूब का फर्क तक नहीं मालूम है। ऐसे में स्कूल अब बच्चों के बैच बनाकर उन्हें लैब में रसायन, भौतिक और जीव विज्ञान के अलावा दूसरे प्रयोग सिखा रहे हैं।
विद्यालय से बच्चों को हर प्रकार का सहयोग प्रदान किया जा रहा है। पाठ्यक्रम पूर्ण करा दिया गया है अब बच्चों की लगातार विज्ञान प्रयोगशाला में प्रयोग कराए जा रहे हैं। - अरविंद कुमार ओझा, लक्ष्मी व्यायाम मंदिर इंटर कॉलेज
मार्च में बच्चों की प्रयोगात्मक परीक्षा होनी है इसलिए अब रोज ही बच्चों को प्रयोगशाला में प्रयोग करवाया जा रहा है। इससे बच्चों की उपस्थिति बढ़ने लगी है, उनकी तैयारी भी हो रही है। - प्रीति खत्री, शियरवुड कॉलेज
अभी तक तो बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा कराए जाने पर जोर दिया जा रहा था, उनको लिखने का प्रयास भी कराया गया, अब बच्चों के साइंस प्रैक्टिकल पर भी ध्यान दिया जा रहा है। - अनु मिश्रा, महात्मा हंसराज कॉलेज
लैब में हम लोग एक ही बार गए हैं, अब दो दिन बाद प्री-बोर्ड शुरू हो जाएंगे। फिर प्रैक्टिकल हैं, इससे बड़ी मुश्किल हो रही है।। - शुभ साहू
एक तो प्री-बोर्ड में ही लिखा नहीं जा रहा है, प्रैक्टिकल में क्या करेंगे पता नहीं। कोरोना काल में लैब की शक्ल ही नहीं देखी है। - वैष्णवी राजावत
अभी तक कभी लैब में प्रैक्टिकल किए ही नहीं हैं, अब प्रैक्टिकल में करेंगे क्या, ये समझ नहीं आ रहा। अब स्कूल में प्रयोग शुरू कराए गए हैं। - अपूर्वा बिरथरे
स्कूल में बच्चों ने प्रैक्टिकल तो दूर की बात, साइंस लैब देखी ही नहीं है, अभी तो पाठ्यक्रम ही पूर्ण करवाया जा रहा है। - गायत्री