झांसी। जहां एक ओर केंद्र सरकार ने भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर दिया हैै, तो वहीं प्रदेश सरकार ने भी सैफई के हॉकी छात्रावास को झांसी और एथलेक्टिस छात्रावास को वाराणसी को दे दिया है। झांसी के बॉक्सिंग छात्रावास को अब हॉकी छात्रावास में तब्दील किया जाएगा। इसके लिए खेल निदेशालय द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं।
समाजवादी सरकार में सर्वाधिक सुविधाओं का गढ़ माना जाने वाले इटावा जिले के सैफई में वर्ष 2014 में मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉलेज को शुरू किया गया था। जिसमें हॉकी व एथलेटिक्स का छात्रावास भी था। झांसी को हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की कर्मस्थली कहा जाता है। मेजर ध्यानचंद ने अपने खेल दम पर विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर झांसी के नाम को रोशन किया है। उनके नाम पर ही मेजर ध्यानचंद स्टेडियम का निर्माण कराया गया है। खेल विभाग द्वारा वर्ष 1992 में मेजर ध्यानचंद स्टेडियम परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त छात्रावास का निर्माण कराया गया था। जिसे बाद में बॉक्सिंग छात्रावास का नाम दिया गया था। जिसमें सिर्फ 15 बाक्सिंग खिलाड़ियों को ही ठहराया जाता था। हॉकी के खिलाड़ियों द्वारा सालों से हॉकी के छात्रावास की मांग की जा रही थी। मांग पर अमल करते हुए सरकार द्वारा सैफई स्थित बालक छात्रावास को झांसी स्थानांतरित कर दिया गया है। बालक छात्रावास में 27 खिलाड़ियों के रहने की व्यवस्था होगी। जिससे हॉकी के खिलाड़ियों में हर्ष का माहौल है।
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर ने बताया कि बुंदेलखंड की नगरी हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की नगरी है। उसी को देखते हुए सरकार द्वारा बालक छात्रावास को सैफई से झांसी स्थानांतरित किया गया है। यह हॉकी के खिलाड़ियों के लिए बड़ी उपलब्धि है।
60 लाख सालाना होगा खर्च
छात्रावास में रहने वाले खिलाड़ियों पर भोजन, चिकित्सा, प्रतियोगिताओं, खेल उपकरणों व शिक्षा पर करीब 60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जिसे सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
खिलाड़ियों को यह होंगी सुविधाएं
- कुशल प्रशिक्षकों की द्वारा खिलाड़ियों को खेल का प्रशिक्षण
- अंतरराष्ट्रीय स्तर के एस्ट्रोटर्फ पर कराया जाएगा अभ्यास
- पढ़ाई व भोजन सहित सभी सुविधाओं का खर्च विभाग द्वारा उठाया जाएगा
- राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर मिलेगी प्राइज मनी