झांसी। बुंदेलखंड में गुटके की कालाबाजारी जोरों पर है। बुंदेलखंड के सातों जिलों में हर महीने करीब 60 करोड़ रुपये गुटके की खपत है। गुटके पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इस हिसाब से पंद्रह करोड़ से अधिक टैक्स मिलना चाहिए, लेकिन चौदह लाख के आसपास ही पंजीकृत कारोबारी टैक्स भरते हैं। इससे व्यापारी टैक्स चोरी करके मालामाल हो रहे हैं, लेकिन वाणिज्यकर के सचल दल टैक्स चोरों पर लगाम कसने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
तमाम कोशिशों के बाद भी वाणिज्य कर विभाग गुटके की कालाबाजारी पर रोक नहीं लगा पा रहा है। झांसी जोन के सातों जिलों (झांसी, बांदा, चित्रकूट हमीरपुर, महोबा, ललितपुर व जालौन) में पंजीकृत करीब पचास व्यापारी हैं। जानकारों का कहना है कि वे गुटका उत्पादन कंपनियों के साथ मिली भगत कर प्रतिमाह साठ करोड़ रुपये का गुटका बिना टैक्स दिए बेच रहे हैं। गुटका कानपुर, मऊरानीपुर, बांदा समेत कई स्थानों से आता है। व्यापारी एक ही बिल पर तीन से चार बार माल मंगा लेते हैं। इसे देखते हुए विभाग ने योजना बनाई थी कि गुटका लाने वाली प्रत्येक गाड़ी के प्रपत्र चेक किए जाएंगे, ताकि सही तस्वीर सामने आ सके। चूंकि सबसे अधिक गुटका कानपुर से मंगाया जाता है, लिहाजा उरई से पहले गाड़ी को रोककर बिलों की जांच का फैसला लिया गया। इसके अलावा पंजीकृत व्यापारियों को सूचीबद्ध करके पता लगाया जाएगा कि वह कितना टैक्स जमा कर रहे हैं। मगर यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
प्रभारी एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन एके पांडे ने बताया कि कोई सटीक सूचना मिलती है तो उस पर कार्रवाई तुरंत की जाती है। वैसे गुटका व्यापारियों द्वारा मंगाए जा रहे माल से संबंधित बिलों को अधिक से अधिक चेक करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए सभी सचल दलों को निर्देशित कर दिया गया है।
कंट्रोल रूम से नहीं हो पा रही निगरानी
वाणिज्य कर मुख्यालय के आदेश पर वाणिज्य कर कार्यालय में कंट्रोल रूम की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य सड़क पर रहने वाले प्रत्येक सचल दल की निगरानी के अलावा टैक्स चोरी के संबंध में आने वाली सूचनाओं का तुरंत आदान - प्रदान करना है। इसके अलावा व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, ट्रक चालकों को भी कंट्रोल रूम के जरिए चौबीस घंटे सुविधा दिलाई जानी है। लेकिन, कोरोना काल के बाद से न तो कंट्रोल रूम खुल पा रहा है और न सचल दलों की निगरानी हो पा रही है। और तो और रजिस्टर में भी सूचनाएं दर्ज नहीं हो पा रही हैं।