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पोती ने कहा-सिगरेट की महक गंदी है तो बाबा छोड़ दी सिगरेट

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झांसी। पोती ने बस एक बार कहा कि बाबा सिगरेट की महक गंदी है। आपका धूम्रपान करना मुझे अच्छा नहीं लगता है। बस ये सुनते ही उसी दिन बाबा ने सिगरेट छोड़ने का फैसला लिया। जिला अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में उनकी काउंसलिंग भी चली। वर्ष 2020-21 में झांसी में 641 लोगों ने धूम्रपान से तौबा कर ली है। पंजीकरण कराने वाले कई और लोग भी जल्द तंबाकू का सेवन करना छोड़ सकते हैं।
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केंद्र में एक मामला ऐसा भी सामने आया जब परिवार के ही किसी व्यक्ति को लंबे समय तक सिगरेट पीने के चलते कैंसर हो गया। इससे दहशत में आए युवक नशा मुक्ति केंद्र पहुंचा। वह भी सात-आठ साल से तंबाकू का सेवन कर रहा था। मनोवैज्ञानिक सलाहकार को बताया कि कभी-कभार उसके मुंह में भी छाले हो जाते हैं। कहीं ये कैंसर तो नहीं हैं। जांच के बाद सलाहकार ने कहा कि अभी कैंसर के लक्षण नहीं हैं। मगर इसे तुरंत छोड़ दो। लंबी काउंसलिंग के बाद उसने धूम्रपान छोड़ दिया। तंबाकू नियंत्रण कक्ष के मनोवैज्ञानिक सलाहकार पंकज तिवारी ने बताया कि वर्ष 2020-21 में 1632 लोगों ने तंबाकू के सेवन की आदत छुड़ाने के लिए पंजीकरण कराया। इनमें से 641 लोग धूम्रपान छोड़ चुके हैं। तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला सलाहकार डॉ. प्रतीक गुबरेले ने बताया कि जिले में लगातार तंबाकू जागरूकता को लेकर कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। ये मनुष्य के शरीर में हजारों रसायनों को छोड़ता है। तंबाकू फेफड़े, दिल और शरीर के अन्य अंगों पर असर डालता है। यदि ठान लें तो सिगरेट छोड़ी जा सकती है। सिगरेट छोड़ने के बाद एक सप्ताह काफी अहम होता है। यदि हफ्ते भर धूम्रपान नहीं किया तो सिगरेट हमेशा के लिए छोड़ सकते हैं।
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छोड़ने के लिए बनाएं ये नियम
- सबसे पहले खुद से सिगरेट छोड़ने का वादा करें।
- धूम्रपान की याद दिलाने वाली चीजों से दूर रहें।
- सिगरेट पीने की अच्छा होने पर कुछ और सोचने लगें।
- खुद को तनावमुक्त रखें, क्योंकि स्मोकिंग का कारण तनाव होता है।
- सिगरेट का विकल्प ढूंढकर दूसरी चीज मुंह में रखें जो नुकसान न करे।
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