उन्होंने कहा था कि झांसी की धरती नेशन फर्स्ट और तिरंगे के सम्मान का महत्वपूर्ण संदेश देती है। बुंदेलखंड की इस भूमि को रानी ने विशेष पहचान दिलाई है। इस दौरान उन्होंने कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘खूब लड़ी मर्दानी...’ की कुछ पंक्तियां भी सुनाईं थीं।
सीडीएस जनरल रावत पहली बार झांसी आए थे और एक बार में ही यहां के लोगों से गहरा नाता जोड़ गए थे। बुधवार को तमिलनाडु में हुए हादसे में उनकी मौत सूचना आने पर झांसी में भी लोग शोकमग्न नजर आए और उनके 19 नवंबर के दौरे को याद करते रहे।
तीन महीने पहले दतिया में किया था अनुष्ठान
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत तीन महीने पहले दतिया आए थे। दतिया में उन्होंने पीतांबरा पीठ में दर्शन और अनुष्ठान किया था। तकरीबन छह-सात घंटे वे मंदिर में रहे थे। इस दौरान उन्होंने वन खंडेश्वर महादेव मंदिर पर जलाभिषेक भी किया था। उनका ये पूरा दौरा बेहद गोपनीय रखा गया था।