झांसी। हालात जल्द नहीं बदले तो खाद बुंदेलखंड की कानून व्यवस्था का सवाल बन सकती है। खरीफ सीजन में कुदरत के हाथों छले गए किसान रबी से आस लगाए हुए हैं। यही वजह है कि चालू सीजन खत्म होने से पहले ही उन्होंने आगामी फसल की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में किसानों के बीच खाद हासिल करने के लिए मारामारी की स्थिति मची हुई है। ललितपुर में दो दिन से खाद हासिल करने के लिए कतार में खड़े एक किसान की मौत ने व्यवस्था को आइना दिखाने का काम किया है।
ललितपुर के किसान भोगीपाल (55) खाद के लिए दो दिन से लाइन में खड़े हुए थे। किसानों की भीड़ अधिक होने की वजह से रात में भी उन्हें खाद भंडार के सामने डेरा डालना पड़ा। लेकिन, शुक्रवार को उनका नंबर आ पाता, इससे पहले ही उनकी सांसें थम गईं। जबकि, इसके अलावा खाद की किल्लत से जूझ रहे किसानों ने हाईवे पर जाम भी लगाया था। हालात किसानों को सहूलियतें देने के तमाम बड़े-बड़े दावों की पाले खोलते नजर आ रहे हैं। ये स्थिति तब है जब रबी सीजन शुरू नहीं हुआ है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में खाद की मांग में भारी इजाफा हो सकता है। समुचित उपलब्धता न होने पर इसे पाने के लिए किसानों के बीच मारामारी की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे निपटने के लिए शासन-प्रशासन को अभी से ही खाद की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही इसके वितरण के पुख्ता इंतजाम बनाने होंगे।
विदित हो कि चालू खरीफ सीजन में मौसम की बेरुखी की वजह से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अगस्त माह में हुई बारिश से जिले के एक लाख 82 हजार किसानों को 95 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। रही सही कसर इसी सप्ताह दो दिन तक हुई मूसलाधार बारिश ने पूरी कर दी। ऐसे में किसान रबी सीजन से आशान्वित हैं। यही वजह है कि सीजन की शुरुआत से पहले ही खाद के लिए मारामारी मचने लगी है।
पुलिस खाद वितरण में प्रशासन का पूरा सहयोग कर रही है। आगे व्यवस्था को और भी चुस्त-दुरुस्त बनाया जाएगा। खाद वितरण केंद्रों के बाहर पुलिस के बंदोबस्त रहेंगे। किसानों को परेशानी न हो इसका पूरी संवेदनशीलता के साथ ख्याल रखा जाएगा। - जोगेंद्र कुमार, डीआईजी