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किसान भाइयों झांसी में नहीं हो सकती मिट्टी की जांच...लैब में केमिकल ही नहीं

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झांसी। अगर किसान अपने खेत की मिट्टी की सेहत की जांच कराना चाहें तो कहां कराएं। झांसी में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में दो साल से केमिकल ही नहीं है। इस केमिकल के बिना जांच की नहीं जा सकती। विभाग का कहना है कि वह लगातार मुख्यालय को लिखकर केमिकल की मांग कर रहे हैं। बताया जाता है कि झांसी की लैब ंमें ही नहीं बल्कि प्रदेश की कई प्रयोगशालाएं केमिकल की कमी के कारण बंद पड़ी हैं। झांसी में ही तीन लाख किसान परेशान हैं।
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कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि किसानों को फसल की बुवाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर करानी चाहिए। जांच से पता चल जाता है कि मिट्टी में कौन से पोषक तत्व कम हैं। उस पोषक तत्व की पूर्ति के लिए क्या किया जाए। लेकिन पिछले दो साल से किसान बगैर मिट्टी की जांच कराए ही फसल की बुवाई कर रहे हैं। कृषि अधिकारी भी किसानों को मिट्टी की जांच के लिए जागरूक तो करते हैं लेकिन यह नहीं बता पा रहे कि मिट्टी की जांच वह कहां कराएं।
अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी में इन तत्वों का होना जरूरी
नाइट्रोजन 280 किग्रा/हेक्टयेर होना चाहिए लेकिन 100 से 150 कि ग्रा/हेक्टेयर है, वहीं, गंधक 15.0 पीपीएम होना चाहिए लेकिन 10 पीपीएम है। इसके साथ ही बोरान 0.5 पीपीएम होना चाहिए जो 0.5 पीपीएम पाई जा रही है। वहीं, मिट्टी में पीएच मान, फॉस्फेट, पोटाश, जस्ता, लोहा, मैग्नीज, तांबा आदि की उपलब्धता होना भी जरूरी है।
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इनकी होती है जांच में आवश्यकता
पोटेशियम, अमोनिया, सल्फेट, फेरस, अमोनियम एसीट्रेट चारकोल पाउडर, डाईक्रोमेट समेत 150 केमिकल की आवश्यकता पड़ती है।
तीन साल में हुईं 20 हजार से ज्यादा जांच
के मिकल की कमी के कारण दो साल में 110 जांच ही हुई हैं, जो भी केमिकल बचा था। उससे जांचें कर दी गई थीं। दो साल पहले जब लक्ष्य मिला था तो घर-घर जाकर लगभग 20 हजार से ज्यादा किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच की थी।
केमिकल की कमी के कारण पिछले दो साल से मिट्टी जांच का कोई लक्ष्य भी नहीं आ रहा है। केमिकल का टोटा है। इसके लिए लिखा जा रहा है। थोड़ा सा केमिकल था जिससे कुछ जांच हो जाती हैं। वह भी बहुत कम। संजीव कुमार सिंह, सहायक निदेशक, भूमि परीक्षण प्रयोगशाला
मिट्टी की जांच कराने से किसानों को पता चल जाता है कि मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है। इसलिए किसानों को मिट्टी की जांच जरूर करवाना चाहिए। उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए। - विवेक कुमार जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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