झांसी। रेलवे पैसेंजर ट्रेनों में एक्सप्रेस के जनरल कोच के बराबर किराया वसूल कर रहा है। यही कारण है कि जिन पैसेंजर ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं रहती थी, वे अभी खाली चल रहीं हैं।
झांसी स्टेशन से प्रतिदिन पैसेंजर ट्रेनों से तीन हजार से अधिक मुसाफिर सफर करते थे, उनकी संख्या तीन सौ से चार सौ पर आकर ठहर गई है। कोरोना संक्रमण के चलते रेलवे ने नियमित ट्रेनों का संचालन 20 मार्च 2020 से बंद कर रखा है। अभी जो ट्रेनें चल रहीं हैं उनको स्पेशल बनाकर नए नंबरों के साथ चलाया जा रहा है। अधिकांश एक्सप्रेस ट्रेनों के चलने के बाद अब एक-एक कर पैसेंजर गाड़ियों का संचालन भी शुरू हो गया है। अपने यहां से सुबह के वक्त झांसी-ललितपुर व झांसी कानपुर के बीच, दोपहर में झांसी से बांदा और शाम के वक्त झांसी से मानिकपुर के बीच पैसेंजर चलाई जा रही है।
मगर इन गाड़ियों को पैसेंजर की जगह अनारक्षित एक्सप्रेस ट्रेन के नाम से चलाया जा रहा है। उक्त ट्रेनों के ठहराव भी पूर्व की तरह सभी स्टेशनों पर हैं। ट्रेनों की गति भी वही है। मगर इन ट्रेनों में किराया एक्सप्रेस के जनरल कोच की तरह वसूला जा रहा है। जैसे कि झांसी से मऊरानीपुर का किराया पैसेंजर ट्रेन में 20 रुपये लगता था, जो अब 40 रुपये लिया जा रहा है। इसी तरह झांसी से बांदा का किराया 40 रुपये की जगह 75 रुपये लिया जा रहा है। बढ़े किराए के कारण यात्री गाड़ियों में सफर करने से बच रहे हैं। सुबह की गाड़ियों में 35 से 40 टिकट और दोपहर व शाम की गाड़ी में कुल ढाई सौ से तीन सौ टिकट बिक रहे हैं।