झांसी। जानवरों को लगाए जाने वाली गला घोंटू बीमारी की वैक्सीन की मांग पूर्वांचल में बढ़ जाने के कारण जिले को कम डोज मिली है। इस कारण अब तक टीकाकरण अभियान पूरा नहीं हो सका है। जिले में पांच लाख से अधिक जानवर हैं, जबकि वैक्सीन करीब आधी 2.44 लाख ही मिल सकी है।
गला घोंटू गाय और भैंस को होता है। इसमें लक्षण शुरू होने के एक या दो दिन में ही जानवर की मौत हो जाती है। रोग की पहचान यह है कि जानवर को बहुत तेज बुखार आता है और पशुओं के मुंह से लार बहने लगती है तथा गले में सूजन आ जाने के कारण घर्र- घर्र की आवाज आती है। आमतौर पर गला घोंटू रोग मानसूनी सीजन में अधिक हमला बोलता है। जिले में 533340 जानवर हैं। इनमें 226789 गायें और 306511 भैंसे हैं। जिले में गला घोंटू वैक्सीन लगाने का लक्ष्य था। वैक्सीन लगाने का अभियान चल रहा था कि प्रदेश के पूर्वांचल में बारिश अधिक होने से वहां पर गला घोंटू रोग बढ़ने की आशंका के कारण स्थानीय स्तर आने वाली वैक्सीन को प्राथमिकता के आधार पर पूर्वांचल भेज दिया गया। इस कारण स्थानीय स्तर पर वैक्सीन लगाने की रफ्तार बहुत कम हो गई। सितंबर तक कुल 2.27 लाख जानवरों को ही वैक्सीन लग सकी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. योगेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि पूर्वांचल में मांग अधिक होने के कारण जिले को कम वैक्सीन मिल सकी, लेकिन अभियान चल रहा है। जब तक सभी जानवरों को वैक्सीन नहीं लग जाएगी, टीकाकरण चलता रहेगा।