झांसी। रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर जबरदस्त कालाबाजारी चल रही है। हाल ये है कि झांसी में भर्ती कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए दूसरे शहरों तक से इंजेक्शन मंगवाना पड़ रहा है। साढ़े नौ सौ से एक हजार रुपये में मिलने वाला ये इंजेक्शन चार से छह गुने दामों पर मिल रहे हैं।
कोरोना के हाई रिस्क वाले मरीजों को तुरंत ही रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया जाता है। यह एंटी वायरल इंजेक्शन कोविड मरीजों के उपचार में बेहद कारगर साबित हुआ है। मरीज के शरीर में मौजूद संक्रमण को यह इंजेक्शन काफी तेजी से खत्म करने लगता है। अप्रैल में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से इंजेक्शन की मांग में तेजी से उछाल आया है। ऐसे में देश भर में मांग के अनुसार इस इंजेक्शन की कमी हो गई है। इसी कारण अब इंजेक्शन की बिक्री में कालाबाजारी शुरू हो गई है। झांसी में तो इस इंजेक्शन की उपलब्धता अभी है ही नहीं। ऐसे में दूसरे शहरों और राज्यों से लोग रेमडेसिविर मंगवा रहे हैं। यह इंजेक्शन चार से छह गुने या इससे भी अधिक दामों पर मिल रहा है। कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं हो रही। हालांकि, औषधि निरीक्षक उमेश भारती ने बताया कि अभी झांसी में रेमडेसिविर की कालाबाजारी का कोई मामला सामने नहीं आया है। शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई होगी।
केस-1
मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में भर्ती दीपक सोनी आईसीयू में भर्ती हैं। हालत बिगड़ने पर बुधवार को डॉक्टरों ने उनके परिजनों से तत्काल रेमडेसिविर इंजेक्शन लाने के लिए कहा। बृहस्पतिवार को देर शाम तक उनके परिजन ग्वालियर से 4000-4000 रुपये में दो इंजेक्शन खरीदकर आए। परिजनों ने बताया कि उनसे साढ़े छह हजार रुपये मांगे गए थे। किसी तरह ढाई हजार रुपये कम किए।
केस-2
कोरोना के मरीज की हालत गंभीर होने पर भी परिजनों को डॉक्टरों ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की व्यवस्था कराने के लिए कहा। तब मेडिकल कॉलेज में रेमडेसिविर की उपलब्धता नहीं थी। उन्होंने बताया कि इंदौर से उन्होंने रेमडेसिवीर मंगवाया। यह इंजेक्शन साढ़े पांच हजार रुपये में मिला। जबकि, आठ हजार रुपये की मांग की गई। काफी मान-मनव्वल के बाद कुछ रुपये कम हुए।