झांसी। 18 साल पहले रानीपुर में हुए दोहरे हत्याकांड में न्यायालय ने शनिवार को सजा सुनाई। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, अत्याचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश इंदु द्विवेदी की अदालत में आरोप सिद्घ होने के बाद अभियुक्त को आजीवन कारावास समेत अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विशेष लोक अभियोजक केशवेंद्र प्रताप सिंह व कपिल करौलिया ने बताया कि लुहरगांव निवासी फूला पत्नी हेमंत कुमार ने चौकी रानीपुर में प्रार्थनापत्र के जरिए बताया कि 26 जून वर्ष 2004 को उसका लड़का राकेश गांव के संतोष केसाथ गया था। उसके ऊपर रानीपुर कस्बा के मनोज श्रोती एवं लुहरगांव के कोमल ने प्राणघातक हमला कर दिया। कोमल ने राइफल से फायर किया। गोली संतोष को लगी। उसके गिरने पर मनोज ने राकेश के ऊपर तलवार से वार कर दिया। वहां मौजूद जमुना एवं मौनी ने भी चाकू एवं बका से हमला बोल दिया। इस प्राणघातक हमले में राकेश एवं संतोष की मौत हो गई। आरोपियों के खिलाफ धारा 302 समेत एससी-एसटी के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई। साक्ष्य एवं गवाहों के आधार पर आरोपी कोमल को आजीवन कारावास समेत बीस हजार रुपये अर्थदंड, आयुध अधिनियम के अंतर्गत तीन वर्ष की कारावास एवं तीन हजार रुपये का अर्थदंड, एससी-एसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास एवं बीस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है। जुर्माने की धनराशि अदा न करने पर कोर्ट ने संपत्ति से वसूली करने का आदेश दिया है।