झांसी। दीपोत्सव मंगलवार को धनतेरस से शुरू हो जाएगा। त्योहारों का यह सिलसिला कार्तिक पूर्णिमा तक चलेगा। इस एक पखवाड़े की अवधि में कई महत्वपूर्ण त्योहार पड़ेंगे। जिन्हें जोरदार ढंग से मनाने के लिए सभी घरों में तैयारियां तेज चल रही हैं। घरों को आकर्षक साज सज्जा देने का काम अंतिम दौर में हैं। बाजारों में भी त्योहारों को लेकर खरीदारी शुरू हो गई है।
धनतेरस दो नवंबर को, होगी कुबेर व भगवान धनवंतरि की पूजा
धनतेरस का पर्व दो नवंबर को मनाया जाएगा। आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि की पूजा होगी। धन के स्वामी कुबेर का भी पूजन किय जाएगा। मान्यता है कि धनतेरस पर सोना, चांदी सहित गृहस्थी की नई वस्तुओं की खरीददारी करने से घर में समृद्धि बढ़ती है। ऐसे में बाजारों में खरीदारी को लेकर काफी भीड़भाड़ रहेगी। वहीं, इस त्योहार के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव प्रारंभ हो जाएगा।
लंबी आयु की कामना को यम दीप जलाएं
नरक चतुर्दशी का पर्व तीन नवंबर को मनाया जाएगा। इसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन चौराहों व घरों की दहलीज पर यम दीप प्रज्ज्वलित किया जाता है। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों की लंबी आयु की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन नरकासुर राक्षस का वध किया था।
दीपावली चार नवंबर को, मां लक्ष्मी, गणेश की होगी पूजा
दीपावली का त्योहार चार नवंबर को मनाया जाएगा। सुबह के समय इस दिन मंदिरों में हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। शाम को शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, गणेश जी व सरस्वती जी की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाएगी। लोग दीप जलाएंगे और भगवान श्रीराम के अयोध्या वापिस आने की खुशियां मनाएंगे।
गोवर्धन पूजा पांच को, होगा मौनिया नृत्य
दीपावली के अगले दिन पड़वा पर अन्नकूट का पर्व मनेगा। भगवान गोवर्धन की घरों व मंदिरों में पूजा होगी। श्रद्धालु इस दिन बुंदेलखंड का पारंपरिक भोजन बनाकर गोवर्धन भगवान को अर्पण करते हैं तथा इसी भोजन को मंदिरों में अन्नकूट भंडारे में भी परोसा जाता है। । खील, बताशा भी अर्पण किए जाएंगे। अन्नकूट का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरण होगा। पड़वा वाले रोज ही ग्रामीण क्षेत्र के लोग मौन व्रत रखते हैं तथा धार्मिक स्थलों पर जाकर दिवारी गीतों का गायन करके मौनिया नृत्य करते हैं। रात में अपने घर पहुंचकर मौन व्रत तोड़ते हैं।
भाई दूज छह नवंबर को
भाई दूज का पर्व छह नवंबर को मनेगा। मान्यता के अनुसार पर्व के दिन यमुना नदी में भाई व बहन के स्नान करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की सुख समृद्धि व लंबी आयु के लिए तिलक करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार देते हैं।
छठ पूजा दस को
षष्ठी पर छठ पूजा का आयोजन होगा। इस दिन श्रद्धालु भगवान सूर्य की पूजा आराधना करते हैं। यह पर्व बिहार, पूर्वांचल समाज द्वारा श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया जाता है। त्योहार दिवस श्रद्धालु जल में खड़े होकर उदय व सूर्यास्त होते सूर्य की पूजा कर उन्हें प्रसाद अर्पण करते हैं।
गोपाष्टमी का पर्व मनेगा 11 को
गोपाष्टमी का त्योहार 11 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन सप्तमी व अष्टमी की तिथि एक साथ रहेगी। पर्व पर लोग अपनी अपनी गायों को सजाते संवारते हैं और पूजा करते हैं।
आंवला नवमी 12 को
आंवला नवमी पर श्रद्धालु आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं। महिलाएं आंवले की परिक्रमा कर जलेबी, मूंगफली, आंवला आदि का दान करती है। यह त्योहार पर्यावरण जागरूकता का संदेश देता है।
तुलसी - शालिगराम के विवाह के साथ शुरू होंगे मांगलिक कार्य
देवोत्थान एकादशी का पर्व इस बार दो दिन मनाया जाएगा। इस त्योहार की तिथि को लेकर पंचांगों में एक मत नहीं है। महंत मार्तंड स्वामी के अनुसार एकादशी की तिथि 14 नवंबर को संपूर्ण दिन रहेगी। इसके साथ ही यह तिथि 15 को उदया रहेगी। ऐसे में कई लोग यह पर्व 15 को भी मनाएंगे। इस दिन भगवान शालिगराम व तुलसी जू का विवाह होता हैं। विवाह कार्य पुन: शुरू होते हैं। घरों में गन्ना का मंडप सजाकर भगवान श्री विष्णु का जागरण किया जाता है।
देव दीपावली 18 को
बैकुंठी चतुर्दशी का त्योहार 18 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन मान्यता है कि देवता दीपावली मनाते हैं। ऐसे में इसे देव दीपावली भी कहा जाता हैं। वहीं, श्रद्धालु घरों व मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। यह त्योहार शैव व वैष्ण्व मत के अनुयायी व्यापक रूप से मनाते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा पर भारत के अधिकांश हिस्सों में नहीं रहेगा चंद्रग्रहण
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 19 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रग्रहण है, लेकिन झांसी सहित भारत के अधिकांश हिस्सों में इसका कोई प्रभाव नहीं रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो महिलाएं कार्तिक माह का व्रत रखती है। वह इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा आराधना कर व्रत का परायण करती हैं। इस दिन कृतिका नक्षत्र रहता हैं।