झांसी। तीन दशक बाद अब जाकर पानी वाली धर्मशाला का पानी साफ नजर आया। धर्मशाला के भीतर करीब आठ मीटर गहराई तक पानी भरा गया है। लेकिन, नीचे सिल्ट न होने से यह पानी साफ नजर आ रहा है हालांकि अभी यहां काम पूरा नहीं हुआ है।
मराठा शासनकाल के दौरान यह धर्मशाला सैकड़ों साल तक आसपास के लोगों की पानी की जरूरत पूरी करती रही लेकिन, करीब चार दशक पहले से इसकी सेहत बिगड़नी शुरू हो गई। शहर का सबसे बड़ा नटवली नाले का गंदा पानी सीधे इसमें गिराया जाने लगा। आसपास के घरों का गंदा पानी भी यहीं गिरने लगा। इससे धर्मशाला का पानी विषैला होना शुरू हो गया। धीरे-धीरे जलकुंभी ने धर्मशाला की पूरी शक्ल बिगाड़कर रख दी। स्मार्ट सिटी मिशन शुरू होने पर विधायक रवि शर्मा की पहल पर इसे प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया। कुल 8.13 करोड़ लागत की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरूआत हुई लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती जलाशय के भीतर से गाद निकालने की रही। दिसंबर महीने से काम की शुरूआत के बाद चार महीने तक गाद निकाली जाती रही। निगम अभियंताओं के मुताबिक इस दौरान करीब 12000 ट्राली गाद बाहर निकाली गई। नटवली नाले को टैप करके इसे बाईपास करके बाहर निकाला गया। इसके बाद जलाशय के भीतर की झिर से ही उसे भरा गया। नाले टैप कर दिए जाने एवं गाद हटाने के बाद अब जाकर जलाशय का पानी साफ हो सका है।
धर्मशाला के पानी की पीएच वैल्यू 7.04
स्वच्छ पानी की पीएच वैल्यू 6.5 से 8.4 के बीच मानी जाती है। निगम अभियंताओं के मुताबिक पानी वाली धर्मशाला में भरे पानी की पीएच वैल्यू परीक्षण के दौरान 7.04 पाई गई है।
अभी यह काम कराया जाना बाकी
जलाशय को साफ करने के बाद अभी सौन्दर्यीकरण कराए जाने का काम बाकी है। अभी कुंड की सीढ़ियों को डेढ़ मीटर ऊंचा किया जाएगा। इसके अलावा धर्मशाला के किनारे योग करने के लिए शेड, बैठने के लिए आकर्षक बेंच, सुंदर लैंप शेड एवं सुविधाजनक फुटपाथ बनाए जाएंगे। हरियाली के लिए पौधे भी लगाए जाएंगे। धर्मशाला 75 मीटर लंबी एवं 70 मीटर चौड़ी। करीब 8-12 मीटर तक गहरी है। पिछले एक साल पहले इसकी सफाई शुरू कराई गई।
अभी जलाशय के आसपास सौन्दर्यीकरण समेत कुछ काम बाकी है। इसे भी अगले कुछ माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। झांसी के लिए यह जरूरी काम था। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ आसपास लोगों को भी फायदा मिलेगा।
अजय शंकर पांडेय
मंडलायुक्त एवं अध्यक्ष, स्मार्ट सिटी लिमिटेड