बारिश के सीजन में डेंगू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को डेंगू के नौ संदिग्ध मरीज मिले हैं। इनमें से प्लेटलेट्स गिरने पर मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में पांच मरीजों को भर्ती किया गया है। एक युवती की एनएस-1 जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अब सभी का एलाइजा टेस्ट कराया जा रहा है। डेंगू के खतरे के मद्देनजर मेडिकल कॉलेज में पहले ही इसका वार्ड बना दिया गया था। जबकि, जिला अस्पताल में सोमवार को डेंगू वार्ड शुरू कर दिया गया। यहां पर चार बेड हैं, जिसमें डेंगू संक्रमित और संदिग्ध मरीज को भर्ती किया जा रहा है। मंगलवार को भी ओपीडी में आने वाले डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की सीबीसी जांच कराई गई।
डॉक्टरों ने बताया कि जिला अस्पताल में तीन और मेडिकल कॉलेज में दो मरीजों की प्लेटलेट्स कम मिली। इनको तुरंत ही डेंगू वार्ड में भर्ती कर लिया गया है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में 21 साल की युवती एनएस-1 किट से जांच में डेंगू पॉजिटिव मिली है। अब सभी संदिग्ध मरीजों का एलाइजा टेस्ट भी कराया गया है। जल्द ही इनकी रिपोर्ट आ सकती है। बुखार का भी कहर, ओपीडी में 30 फीसदी वायरल रोगी
डेंगू के लक्षण
- तेज बुखार और ठंड लगना
- जोड़ों, मांसपेशियों, आंखों में दर्द
- थकान व ऐंठन
- त्वचा के लाल चकत्ते
- मितली और उल्टी
- नाक से खून आना
- मसूड़ों से खून आना
बच्चे से लेकर बूढ़े तक बीमार
डेंगू ही नहीं इस सीजन में वायरल बुखार भी मरीजों को खूब शिकार बना रहा है। हाल ये है कि ओपीडी में 30 फीसदी मरीज तो वायरल का शिकार ही आ रहे हैं। इसमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
दिन की तेज गर्मी में लोग ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक सेवन कर लेते हैं। दिन-रात कूलर-एसी चलाते हैं। रेफ्रिजरेटर में रखा भोजन खाते हैं। इससे जुकाम-खांसी और वायरल बुखार हो रहा है। कई दिन तक बुखार रहने से निमोनिया की स्थिति बन जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। वायरल संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति तक भी पहुंचता है। इसलिए बेहतर होगा कि मरीज से दूरी बनाए रखें। जिला अस्पताल की ओपीडी में 150 में करीब 50 मरीज तो मेडिकल कॉलेज में 300 में 100 मरीज वायरल के आ रहे हैं।
वायरल के लक्षण
- खांसी-जुकाम, तेज बुखार
- थकान, जोड़ों, सिर में दर्द
- मांसपेशियों, बदन में दर्द
- दस्त लगना
- त्वचा पर लाल रेशे
- आंखें लाल होना
मंगलवार को एलाइजा टेस्ट की जांच रिपोर्ट में एक भी डेंगू मरीज नहीं मिला है। एनएस-1 किट से जांच रिपोर्ट मान्य नहीं है। डेंगू के मद्देनजर जगह-जगह लार्वी साइट का छिड़काव कराया जा रहा है। - आरके गुप्ता, जिला मलेरिया अधिकारी।