फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोते हुए बच्चे बोले, दादा-दादी अंदर हैं उनको भी बाहर निकालो

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। दर्दनाक अग्निकांड में बुजुर्ग व्यवसायी श्रीराम अग्रवाल एवं उनकी पत्नी शांतिदेवी की मौत हो गई जबकि परिवार के सात सदस्यों को बाहर निकल लिया गया। बाहर निकाले जाने के बाद भी परिवार के बच्चों को अपने दादा-दादी की परवाह थी। रोते-बिलखते हुए तीनों बच्चे बचाव में जुटे पुलिसकर्मियोें एवं आसपास के लोगों से दादा-दादी के अंदर फंसे होने की बात कहते हुए उनको बाहर निकालने की गुहार लगाते रहे।
विज्ञापन

तड़के चार बजे आग लगने के बाद करीब साढ़े चार बजे आसपास के लोग मदद करने को आ जुटे थे। सीढ़ियां जुटाकर इन लोगों ने अंदर फंसे परिवार के लोगों को बाहर निकलना शुरू किया। सबसे पहले अंदर से बच्चों को बाहर निकाला गया। अजय के बारह साल के पुत्र राघव के अलावा संजय के पुत्र माधव एवं उसकी बहन समृद्घि को एक के बाद एक बाहर निकाला गया। इनके बाहर आने के बाद संजय की पत्नी सुधी को बाहर निकाला गया। उसके बाद अजय की पत्नी ममता को नीचे उतारा गया। आखिरी में अजय एवं संजय को बाहर निकाला गया। यह सभी सातों सदस्य कमरे के बाहर आ गए थे। इस वजह से बाहर निकल सके। इनके बाहर आने तक ऊपरी मंजिल पर आग और फैल गई। अंदर पूरे कमरों में धुआं भर गया। बचाव में लगे सदस्यों का कहना था कि अंदर कुछ भी नहीं दिखाई पड़ रहा था। इसी बीच फायर ब्रिगेडकर्मी भी पहुंच गए। इन लोगों से तीनों बच्चे अपने दादा-दादी के भीतर होने की बात कहते हुए उनको बाहर निकालने की गुहार लगा रहे थे। वहां मौजूद लोग उनको बाहर निकालने का भरोसा दिला रहे थे लेकिन, आखिरकार उनके दादा-दादी को बचाया नहीं जा सका। परिजनों का कहना था कि श्रीराम एवं शांतिदेवी तीनों (राघव, माधव एवं समृद्घि) से बेहद लगाव रखते थे। बच्चों भी उनके साथ काफी घुले-मिले थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें