झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने बीएएमएस छात्रों के नंबर बढ़ाने के फर्जीवाड़े के मामले में सोमवार को दो सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। हालांकि, बीयू ने आंतरिक कमेटी से ही जांच कराने का फैसला लिया है। कमेटी को जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
गोपनीय शिकायत के बाद बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी की जांच में बीएएमएस के छात्रों की 500 कॉपियों के पहले पन्ने पर हैश टैग का चिह्न मिला है। बीयू अधिकारियों का भी कहना है कि प्रथम दृष्टया ही ये स्पष्ट हो गया है कि ये चिह्न नंबर बढ़ाने के लिए डाला गया। इन छात्रों की कॉपियों में भी दूसरे विद्यार्थियों की तुलना में औसत से ज्यादा अंक दिए गए हैं। ये शिकायत परीक्षा से पहले मिली। तब बीयू प्रशासन ने इसे गोपनीय रखा और मूल्यांकन तक का इंतजार किया। इसके बाद जून में कराई जांच में 15 फीसदी कॉपियों में एक सा चिह्न मिला। वहीं, शिकायतकर्ता ने एक कॉलेज का नाम लेते हुए कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। आरोप ये भी है कि नंबर बढ़ाने का खेल पिछले तीन सालों से चल रहा है। ऐसे में बीयू 2019-20 की उत्तर पुस्तिकाओं की भी जांच कराने पर विचार कर रहा है। वहीं, सोमवार को दो सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया। प्रो. अर्चना वर्मा और डॉ. आलोक वर्मा को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपें।
मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। कमेटी जल्द ही जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। मामले में दोषी मिलने वाले शिक्षक, कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बीयू।