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अमर उजाला शिक्षा अभियान : बच्चे मन लगाकर करें पढ़ाई की बात, अभिभावक और शिक्षक दे रहे साथ

Sat, 26 Mar 2022 12:27 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

सार

लॉकडाउन के कारण बच्चों समेत सभी को लंबे समय तक घरों में सीमित होकर रहना पड़ा था। बच्चों के खेलकूद, घूमना-फिरना, स्कूल जाना, दोस्तों से मिलना सब एकदम से बंद होकर मोबाइल और घर तक सीमित हो गया।
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अमर उजाला शिक्षा अभियान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना महामारी के दौर में बच्चों की मनोस्थिति में काफी गिरावट आई है। शिक्षक और अभिभावक दोनों अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर बच्चों का मानसिक विकास करने का प्रयास कर रहे हैं। विद्यालयों में और घरों में बच्चों को अच्छा वातावरण और व्यवहार देकर उनको शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि बच्चे पहले की तरह मन लगाकर पढ़ाई-लिखाई की बातें करें, उनका मन न भटके।

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लॉकडाउन के कारण बच्चों समेत सभी को लंबे समय तक घरों में सीमित होकर रहना पड़ा था। बच्चों के खेलकूद, घूमना-फिरना, स्कूल जाना, दोस्तों से मिलना सब एकदम से बंद होकर मोबाइल और घर तक सीमित हो गया। बच्चे इस स्थिति को झेलने के लिए मानसिक रूप से न तो परिपक्व थे और न ही तैयार। इसके कारण उनके व्यवहार और शरीर में कई बदलाव देखने मिले। बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, वजन बढ़ना जैसी कई समस्याएं होने लगीं। इसके अलावा कक्षा में देर तक बैठ न पाना, परीक्षा के दौरान बच्चों को घबराहट होना, कई का परीक्षा के दौरान बेहोश हो जाना, बच्चों का परीक्षा न देने और स्कूल न जाने की जिद करना आदि समस्याएं अभिभावकों और शिक्षक दोनों के लिए परेशानी बनती जा रही थीं। उधर, कई बच्चे सिर दर्द, कमर दर्द, लिखने से हाथों में दर्द और आंखों में दर्द आदि की शिकायत से परेशान हो रहे थे।

ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों ने अपने-अपने स्तर पर वातावरण और व्यवहार में बदलाव कर बच्चों को पहले जैसी स्थिति में लाने की ठानी है। अभिभावकों ने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल करने और टीवी देखने के समय को बहुत सीमित कर दिया है। वह बच्चों को घर से बाहर खेलने और दोस्तों से मिलने के लिए भेज रहे हैं। वहीं बच्चों को शिक्षा से वापस जोड़ने के लिए अभिभावक ट्यूशन टीचर लगा रहे हैं। विद्यालय प्रशासन भी बच्चों को पढ़ाने का अपना रवैया बदल रहा है। बच्चों को कक्षाओं में सहज करने के लिए उनसे बातचीत, अंत्याक्षरी, छोटे-छोटे विषयों पर परिचर्चा आदि कर बच्चों को वापस से कक्षाओं से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
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कई बच्चे ऐसे थे पास मोबाइल ही नहीं था, तो वे तो पूर्णत: शिक्षा से दूर रह गए। ऐसे बच्चों के लिए नए सत्र में नई कक्षा के साथ-साथ पुरानी कक्षा का भी सिखाया जाएगा। बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। - अंजुम, प्रधानाचार्या, हाफिज सिद्दीकी नेशनल बालिका इंटर कॉलेज

नए सत्र से पहले तो यह देखा जाएगा कि बच्चे को पुराना कितना याद है, उस हिसाब से बच्चों को नए सत्र का पढ़ाया जाएगा। बच्चों पर एकदम से पढ़ाई का बोझ नहीं डालेंगे, उनको बातों-बातों में पढ़ाई की ओर लेकर जाएंगे। - श्वेता सोनी, शिक्षक मदर टेरेसा कांवेंट स्कूल
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मैंने मेरे बच्चे का एडमिशन कराया है, अप्रैल से स्कूल शुरू हैं, इसके लिए समय से सोने-जागने की आदतें डलवा रहे हैं। - निशी सोनी, अभिभावक
बच्चे परीक्षा को लेकर डर रहे थे लेकिन स्कूल जाने के लिए बच्चे उत्साहित नजर आ रहे हैं। दोस्तों से मिलकर बच्चे बहुत खुश हैं। - रितु, अभिभावक
इतने समय तक स्कूल नहीं जा रहे थे तो दोस्तों से नहीं मिल पा रहे थे, स्कूल जाने में मजा आ रहा है। - अंशिका, विद्यार्थी
दो वर्षों से ऑनलाइन पढ़कर परेशान हो गए थे, खेलने भी नहीं जा पाते थे न कहीं घूमने। - वैष्णवी, विद्यार्थी

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