झांसी में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल में जिस रेमडेसिविर को लेकर जबरदस्त मारामारी मची थी, अब 110 इंजेक्शन के पास रखे-रखे एक्सपायर हो गए हैं। हाल ये है कि कंपनियां तक इन इंजेक्शनों को वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं। थोक में इन इंजेक्शनों की कीमत साढ़े चार लाख है। फुटकर में कई गुना कीमतों पर ये बिकते हैं।
कोरोना की दूसरी लहर ने झांसी समेत देश भर में जबरदस्त कहर बरपाया। उस समय रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग में तेजी से उछाल आया। हाल ये रहा कि मरीज के परिजन खुद डॉक्टर से रेमडेसिविर लगाने की मांग करने लगे। इंजेक्शन की एडवांस बुकिंग तक लोग कराने लगे।
दूसरी तरफ, इंजेक्शन की जबरदस्त कालाबाजारी शुरू हो गई। झांसी में एक लाख रुपये तक ब्लैक में रेमडेसिविर इंजेक्शन बिके। मुख्यमंत्री के सामने तक भाजपा विधायकों ने ये मुद्दा उठाया था।
कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद इनकी मांग बिल्कुल घट गई। वहीं, अब झांसी में 110 रेमडेसिविर इंजेक्शन केमिस्टों के पास रखे-रखे एक्सपायर हो गए हैं। थोक में एक इंजेक्शन की कीमत चार हजार रुपये है। मगर फुटकर में ये मनमानी दरों पर बिकते हैं। दवा विक्रेताओं ने बताया कि अब कंपनियां इंजेक्शन वापस लेने को भी मना कर रही हैं। ऐसे में उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा है।