केंद्र सरकार ने तकनीकी खामियों के कारण सेंट्रल ई-वे बिल की व्यवस्था को अग्रिम आदेश तक टाल दिया है। व्यवस्था के दोबारा लागू होने तक कारोबारी प्रांत के अंदर या प्रांत के बाहर से बिल और बिल्टी पर ही माल मंगा सकते हैं। बहती बनवाने या अन्य कोई पुराना फर्म की लगाने की जरूरत नहीं है।
जीएसटी के अंतर्गत एक फरवरी से देश में माल मंगाने और भेजने के लिए एक फार्म (सेंट्रल ई-वे बिल) की व्यवस्था शुरू हो गई थी। ई-वे बिल लागू के साथ ही बहती समेत अन्य फार्म बंद हो गए थे। मगर, केंद्रीय सर्वर पर फार्म लोड करने के लिए एक साथ पड़े भार के कारण तकनीकी खामियां उत्पन्न हो गईं। इस कारण केंद्र सरकार ने ई- वे बिल व्यवस्था पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। हालांकि, यह व्यवस्था ट्रायल के तौर पर लागू रहेगी। दोबारा व्यवस्था शुरू होने तक कारोबारी देश के किसी भी काने से बिल और बिल्टी पर अपना माल मंगा और भेज सकते हैं। चेकिंग के दौरान ट्रक चालक के पास माल के बिल और वाहन की बिल्टी होना जरूरी है।
‘ई-वे बिल व्यवस्था स्थायी रूप से लागू होने तक ट्रायल के तौर पर जारी रहेगी। इसकी कानूनी वैधता नहीं रहेगी। ई-वे बिल लागू होने तक बिल और बिल्टी पर ही कारोबारी माल मंगा और भेज सकते हैं। पुराने किसी फार्म को लगाने की भी आवश्यकता नहीं है।’
एसएस मिश्रा, ज्वाइंट कमिश्नर वाणिज्यकर।