झांसी/तालबेहट (ललितपुर)। केरल में मानसून की दस्तक से पहले ही मौसम में बदलाव दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को झांसी में तेज हवाएं चलीं तो ललितपुर के तालबेहट में काफी देर तक ओले गिरे। इससे सब्जी उगाने वाले किसानों को नुकसान हुआ। साथ ही ओले की वजह से जानवर चोटिल हो गए। हालांकि, मौसम में आए इस बदलाव से गर्मी जरूर कुछ कम हो गई। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि आगे के दिनों में भी ज्यादा तेज गर्मी नहीं पड़ेगी।
नौतपा की शुरूआत में अधिकतम तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाने की वजह से लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा था। स्थिति ये थी कि घरों से बाहर काफी देर तक धूप में रहने पर त्वचा झुलस जा रही थी। केरल में दो जून को मानसून की दस्तक होती है लेकिन इससे पहले ही शुक्रवार को नौतपा के पांचवें दिन मौसम में एकदम से बदलाव आ गया। झांसी में बादलों की आवाजाही के बीच तेज हवाएं चलीं। इससे अधिकतम तापमान लुढ़ककर 41 तो न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। तापमान में आई गिरावट के कारण गर्मी में कुछ कम हो गई। वहीं, तालबेहट में शुक्रवार की शाम चार बजे आसमान में काले बादल छा गए। देखते ही देखते तालबेहट और आसपास के कुछ गांवों में हल्की बूंदाबांदी होने लगी। ग्राम पुराखुर्द, गेंवरा गुंदेरा, उगरपुर आदि गांवों में जब तक ग्रामीण बारिश से बचते तब तक ओले गिरने लगे। इससे लोग और जानवर अपने बचाव के लिए भागे। ओलावृष्टि से सब्जी पैदा करने वाले किसानों का नुकसान हो गया। कुछ जानवर भी चोटिल हो गए।
कर्मचारियों ने ली मंदिर में शरण
टिड्डी दल पर नजर रखने के लिए कृषि विभाग के कर्मचारी दीपेंद्र सिंह, पंकज शर्मा, बसंत आदि ग्राम गेवरा गुंदेरा के जंगल में थे। उसी समय अचानक ओले गिरना शुरू हो गए, जिससे उन्हें छिपने के लिए एक मंदिर में शरण लेना पड़ी।
वर्षा को ठीक नहीं मान रहे किसान
नौ तपा के तीसरे दिन बुधवार को कुछ गांवों में मामूली बारिश और शुक्रवार को कई गांवों में वर्षा के साथ ओले गिरने से गर्मी का ग्राफ कुछ कम हो गया। लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली लेकिन नौ तपा में बारिश होना किसान अच्छा नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि नौ तपा में वर्षा होने से साल भर बारिश अच्छी नहीं होती है।