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पीएम के वास्ते बंद हुए रास्ते: निकल नहीं पाई एंबुलेंस...प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को चलना पड़ा पैदल

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पीएम के वास्ते बंद हुए रास्ते: निकल नहीं पाई एंबुलेंस...प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को चलना पड़ा पैदल
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झांसी। प्रधानमंत्री के दौरे के पांच दिन पहले ही शहर के रास्तों पर बेरिकेडिंग के चलते रविवार को एक एंबुलेंस फंस गई। प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को अस्पताल पहुंचने के लिए पहले पैदल चलना पड़ा। फिर ऑटो के जरिए वह महिला अस्पताल पहुंची। अस्पताल पहुंचने के दस मिनट बाद ही गर्भवती ने बेटी को जन्म दे दिया। अब मां-बेटी दोनों ही स्वस्थ हैं।
पीएम के दौरे को लेकर सुरक्षा कारणों से प्रमुख चौराहों से लेकर गलियों तक में बेरिकेडिंग लगा दी गई है। ऐसे में लोगों को गलियों-गलियों में काफी लंबा चक्कर काटकर आना-जाना पड़ रहा है। रविवार को एक गर्भवती महिला को बेरिकेडिंग के चलते परेशानी झेलनी पड़ गई। बताया गया कि बबीना के बल्लमपुर निवासी कल्पना पाल (23) 108 एंबुलेंस से महिला अस्पताल आ रही थी। शाम पांच बजे के आसपास किले की ढलान से मिनर्वा चौराहे की तरफ उतरते हुए बेरिकेडिंग से रास्ता बंद था। ऐसे में एंबुलेंस वहीं पर खड़ी हो गई। एंबुलेंस चालक ने झलकारी बाई तिराहा से पंचकुइयां होते हुए अस्पताल पहुंचाने की बात कही तो तेज प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला ने देर लगने की बात कहते हुए मना कर दिया। आशा कल्पना के साथ गर्भवती एंबुलेंस से उतारकर पैदल ऑटो तक पहुंची। ऑटो से महिला अस्पताल पहुंची। आशा ने बताया कि दस मिनट बाद ही महिला ने बेटी को जन्म दे दिया। वहीं, इस संबंध में जब 102, 108 एंबुलेंस के मंडलीय प्रबंधक दिनेश सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पीएम के आगमन को लेकर सुरक्षा दृष्टि से किले के पास बेरिकेडिंग की गई है। अगर ये खुल जाएगी तो मरीजों को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाने में कोई समस्या नहीं होगी।
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इमरजेंसी में कैसे अस्पताल पहुंचेंगे मरीज
किले के नजदीक ही जिला अस्पताल और महिला अस्पताल हैं। चारों तरफ के मार्गों में बेरिकेडिंग तो कर दी गई है मगर शायद इस बात का ख्याल नहीं रखा गया कि मरीज कैसे अस्पताल पहुंचेंगे। एंबुलेंस तक के जाने के लिए इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में इमरजेंसी हालात में कोई मरीज कैसे अस्पताल पहुंचेगा, ये बड़ा सवाल है।
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रोज 350 से ज्यादा एंबुलेंस से पहुंचते
प्रोग्राम मैनेजर सुनील कुमार ने बताया कि जिले में 108 की 26 और 102 की 24 एंबुलेंस हैं। दिन भर में साढ़े तीन सौ से ज्यादा लाभार्थियों को एंबुलेंस से सुविधा दी जाती है।
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