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बार चुनाव: कचहरी में सियासत तेज, प्रत्याशियों ने झोंकी ताकत

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झांसी। मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चली हैं। जीत हासिल करने के लिए प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। पूरा कचहरी परिसर चुनावी रंग में रंगा नजर आ रहा है। प्रत्याशी अपने समर्थकों की टोलियों के साथ दिन भर प्रचार में जुटे रहते हैं।
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जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव 18 अगस्त को होगा, जिसमें 1629 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। संघ के 20 पदों पर 65 प्रत्याशियों ने दावेदारी की है। हवा का रुख अपने ओर मोड़ने के लिए प्रत्याशी इन पूरा जोर लगाए हुए हैं। कचहरी परिसर प्रचार सामग्री से पट गया है। हर ओर बैनर, पोस्टर और होर्डिंग नजर आते हैं। मतदाताओं को खुश करने के लिए प्रत्याशियों की ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। कचहरी में जगह-जगह प्रत्याशियों की ओर से जलपान के बंदोबस्त किए गए हैं। सुबह-शाम प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ घर-घर जाकर अधिवक्ताओं से संपर्क करने में भी जुटे हुए हैं।
एल्डर्स कमेटी ने बैठक करके तय की रणनीति
एल्डर्स कमेटी की बैठक के दौरान चुनाव को लेकर रणनीति तय हुई। बैठक में जानकी शरण पांडेय एवं पूर्व अध्यक्ष अनुराग पांडेय को मतदान एवं पर्यवेक्षण की निगरानी करेंगे। इस दौरान स्वतंत्रता दिवस को लेकर भी चर्चा हुई। सभी प्रत्याशियों से झांसी क्लब के प्रवेश एवं निकासी की तरफ किसी तरह के टेंड एवं प्रचार-प्रसार संबंधी कार्य न करने की अपील की गई। इस दौरान विवेक कमार वाजपेई, ओपी यादव, शिरोमणि जैन, राकेश टंडन, साधना सिंह, केवल कृष्ण यादव, जयदेवी साहू, धर्मेंद्र सिंह जादौन, नरेंद्र विरथरे आदि उपस्थित थे।
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अधिवक्ताओं की मांगों को पुरजोर ढंग से उठाने वाले व बार की गरिमा को बढ़ाने वाले प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा।
- अविनाश शुक्ला
नए आने वाले अधिवक्ताओं को चैंबर के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। उन्हें आसानी से चैंबर मिलने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
- राहुल शर्मा
अधिवक्ता व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके लिए पेंशन का प्रावधान किया जाना चाहिए। ताकि, वृद्धावस्था में वे किसी पर आश्रित नहीं रहें।
- संदीप सिंह यादव
दूसरों को इंसाफ दिलाने वाले कई अधिवक्ता खुद उत्पीड़न का शिकार हैं। अधिवक्ताओं को न्याय दिलाने वाले प्रत्याशियों को चुना जाएगा।
- शमीम खान
वकीलों को रेलवे रिजर्वेशन में अलग से कोटा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में भी उनके लिए अलग से व्यवस्था होनी चाहिए।
- मो. फय्याज
अधिवक्ताओं के लिए कचहरी परिसर में सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए। इसके अलावा वादकारियों के लिए अलग से बंदोबस्त किए जाने चाहिए।
- अब्दुल वहीद
देश की आजादी की लड़ाई में वकीलों की अहम भूमिका रही थी। लेकिन, देश के आजाद होने के बाद उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
- इमरान खान
कचहरी परिसर में पार्किंग तक का समुचित इंतजाम नहीं है। इससे केवल वकीलों को ही नहीं, बल्कि वादकारियों को भी समस्या उठानी पड़ती है।
- हिमांशु शर्मा
कचहरी से गुजरने वाली सड़कों पर हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। लेकिन, पुलिस दूर-दूर तक नजर नहीं आती है।
- प्रमोद कुमार मिश्रा
अधिवक्ताओं को सरकार की ओर से कोई अतिरिक्त सहायता नहीं दी जाती है। योजनाएं बनाते समय वकीलों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
- साजिद अली
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