मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झांसी की जल सहेलियों की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। आज गुरुवार को उन्हीं जल सहेलियों को सम्मनित किया गया। इन महिलाओं ने घुरारी नदी के संरक्षण का बीड़ा उठाया था।
झांसी में बृहस्पतिवार को राजकीय संग्रहालय में परमार्थ समाज सेवी संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जल सहेली बहनों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है। हम ऐसे देश में जन्मे हैं, जहां जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
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संस्था के अध्यक्ष संजय सिंह ने जल सहेलियों की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि आज जल सहेलियां केवल हमारे देश में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही हैं। उनके द्वारा जल संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों की गूंज अब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है।
इस दौरान 18 जल सहेलियों को सम्मानित किया गया। बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में जल सहेलियों की तारीफ की थी। पीएम ने घुरारी नदी को बचाने में जल सहेलियों के योगदान का जिक्र किया था।
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मन की बात में पीएम मोदी ने की थी तारीफ
29 सितंबर को हुई पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम के दौरान जल सहेलियों बात हुई थी। रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में जल संकट से निपटने में देशभर में किए जा रहे जल संरक्षण के प्रयासों को लेकर यूपी के झांसी का नाम पीएम मोदी ने लिया था।
पीएम मोदी ने मन की बात में झांसी की महिलाओं की जमकर तारीफ की थी। क्योंकि इन महिलाओं ने घुरार नदी को नया जीवन दिया। पानी की बर्बादी को रोका था। झांसी में स्वंय सहायक समूह की महिलाओं के योगदान दिया।
पीएम मोदी ने क्यों की थी तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में घुरारी नदी का जिक्र यूं ही नहीं किया। लगभग 25 साल पहले इस नदी की धारा अविरल थी। आसपास का ग्राम समाज इसे जीवनदायिनी मानता था लेकिन बाद के दिनों में यह नदी अनदेखी का शिकार हो गई।
नदी की सतह जलकुंभी से पट गई और खनन माफियाओं ने भी इसे नुकसान पहुंचाया, जिससे यह नदी मृत प्राय: स्थिति में पहुंच गई थी। इसे नया जीवन देने का काम जल सहेलियों ने किया। घुरारी नदी बेतवा की सहायक नदी है, जिसका उद्गम बबीना आर्मी कैंट के जंगलों से होता है। यह नदी निवाड़ी जनपद के चौदह गांवों के अलावा झांसी के सिमरावारी, खैलार से होकर गुजरती है। ओरछा में कंचनघाट से 50 मीटर से पहले यह नदी बेतवा में समाहित हो जाती है। लगभग 25 साल पहले आसपास के गांवों में खेतों की सिंचाई इसी नदी के पानी से होती थी। लेकिन धीरे-धीरे यह प्रदूषण की चपेट में आ गई।
सेल्फ हेल्प ग्रुप से है कनेक्शन
पीएम मोदी ने कहा था कि झांसी में कुछ महिलाओं ने घुरारी नदी को नया जीवन दिया है। ये महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी हैं और उन्होनें 'जल सहेली' बनकर इस अभियान का नेतृत्व किया है। इन महिलाओं ने मृतप्राय हो चुकी घुरारी नदी को जिस तरह से बचाया है, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी! इन जल सहेलियों ने बोरियों में बालू भरकर चेकडैम तैयार किया, बारिश का पानी बर्बाद होने से रोका और नदी को पानी से लबालब कर दिया। इन महिलाओं ने सैकड़ों जलाशयों के निर्माण और उनके रीवाइवल में भी बढ़-चढ़कर हाथ बटाया है। इससे इस क्षेत्र के लोगों की पानी की समस्या तो दूर हुई ही है, उनके चेहरों पर, खुशियां भी लौट आई हैं।