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झांसी में अभी भी 40 फीसदी किशोरियों में खून की कमी

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झांसी। जिले में अभी भी 40 फीसदी किशोरियों में खून की कमी (एनीमिया) है। हालांकि, पिछले पांच सालों में इसमें 18 प्रतिशत की कमी आई है। एनीमिया मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
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नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-5 (एनएफएचएस) के मुताबिक झांसी में वर्ष 2015-16 में 15 से 19 साल की 58 फीसदी किशोरियों में खून की कमी मिली थी। वर्ष 2020-21 में हुए एनएफएचएस सर्वे में ये आंकड़ा 18 फीसदी घटकर 40 प्रतिशत रह गया है। सीएमओ डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि बालिकाओं में आयरन की कमी एनीमिया को बढ़ाता है। यदि समय रहते इसका पता न चले तो शारीरिक, मानसिक रूप से अवसाद का भी कारण बन सकता है। मातृ-मृत्यु के कारणों में से मुख्य कारण भी एनीमिया है। इसके लक्षण महसूस होने पर पास के स्वास्थ्य केंद्र पर हीमोग्लोबिन की जांच करानी चाहिए। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि माइल्ड एनीमिया किशोरियों में व्यवहार परिवर्तन के साथ-साथ मानसिक समस्याओं को विकसित करता है। इसमें घबराहट, अवसाद, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, तनाव के चलते सिर दर्द होना शामिल है।
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