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बीयू का फर्जी डिप्लोमा लगाकर बिहार में 38 बन गए अमीन

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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का फर्जी डिप्लोमा लगाकर बिहार में 38 लोग अमीन की नौकरी पा गए। इन्होंने उस कोर्स का डिप्लोमा लगा दिया, जो यहां संचालित ही नहीं होता है। बिहार के भू अभिलेख और परिमाप निदेशालय ने नौकरी पाए अमीनों के प्रमाण पत्रों को सत्यापन के लिए विवि को भेजा, तो इसका खुलासा हुआ। विवि की ओर से बिहार शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी गई, जिसके बाद इन अमीनों की सेवा समाप्त कर दी गई है।
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बिहार में भू अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय ने जुलाई 2020 में संविदा पर 3456 अमीनों की नियुक्तियां निकाली थीं। इसमें 38 अभ्यर्थियों ने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा लगाकर संविदा पर नौकरी पा ली। सभी को 30 हजार रुपये मानदेय भी मिलने लगा। इसी बीच, निदेशालय ने विश्वविद्यालय को सत्यापन के लिए प्रमाणपत्र भेज दिए। कुलसचिव नारायण प्रसाद ने परीक्षा विभाग के पास पत्र भेजकर जांच करने के लिए कहा। परीक्षा विभाग ने जांच के दौरान पाया कि बीयू में सिविल इंजीनियरिंग कोर्स चलता ही नहीं है। यही जवाब लिखकर निदेशालय को भेज दिया। निदेशालय ने बीयू और अन्य विश्वविद्यालयों से जवाब प्राप्त होने के बाद फर्जी प्रमाणपत्र लगाने वाले अमीनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। अब इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है। साथ ही जितना मानदेय दिया गया है, उसकी रिकवरी भी होगी।
बिहार, झारखंड के रहने वाले हैं
फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी पानी वाले अमीन बिहार के छपरा, मदेपुरा, पटना, भागलपुर, वैशाली, भोजपुर आदि जिलों के रहने वाले हैं। जबकि, एक अमीन झारखंड का रहने वाला है।
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भू अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय ने कई अमीनों के प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए भेजे थे। इसमें सिविल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा का प्रमाणपत्र लगा था। जबकि, ये कोर्स बीयू में चलता ही नहीं है। यही जवाब निदेशालय को भेज दिया है। - राजबहादुर, परीक्षा नियंत्रक, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी
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