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उत्तम संयम पाले ज्ञाता, नर भव सफल करे ले साता

झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Sep 2021 02:17 PM IST
A knower who has good restraint, may the male be successful, take Sata
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झांसी। पर्यूषण पर्व महानगर के जैन मंदिरों में धर्म की बयार बह रही है। श्रावक-श्राविकाएं प्रभु की भक्ति और नियम संयम के साथ कर्मों की निर्जरा कर रहे हैं। बुधवार को महानगर के जैन मंदिरों में उत्तम संयम धर्म की आराधना की गई। इस मौके पर आर्यिका विविक्तश्री माताजी ने प्रवचन दिए।
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उन्होंने कहा कि आत्मार्थी के लिए उत्तम संयम धर्म शृंगार है। जैसे बिना ब्रेक की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है, इसी तरह बिना संयम के मनुष्य जीवन भी दुर्घटना का शिकार होकर पतन को प्राप्त हो जाता है। आत्मा और शरीर के भेद को जानकर जीवन में संयम को जरूर आत्मसात करना चाहिए।

इससे पूर्व पंडित बालचंद्र शास्त्री ने भगवान की शांतिधारा, अभिषेक, पूजन संपन्न कराया। भक्तों ने इंद्र-इंद्राणी की वेशभूषा में भक्ति संगीत के बीच नृत्य करते हुए अर्घ्य समर्पित किए । रात्रि में खुला प्रश्न मंच का आयोजन शशी जैन चतुर्दशी ग्रुप द्वारा किया गया। इस अवसर पर पंचायत उपाध्यक्ष रविंद्र जैन, पंचायत महामंत्री प्रवीण कुमार जैन, मंत्री बड़ा मंदिर सुरेंद्र सराफ , वीरेंद्र चौधरी, अमित प्रधान, रविंद्र जैन, प्रदीप जैन, विवेक, आलोक जैन, अमन जैन, सुशील जैन, गोकुल चंद्र जैन एडवोकेट समेत महिलाएं पुरुष व बच्चे उपस्थित रहे। उधर, विशुद्धोदय तीर्थ प्यावल जी में भक्तों ने पर्यूषण पर्व का पूजन किया। नगरा स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में सुबह अभिषेक पूजन के बाद शाम को आरती और कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें आनंजय जैन प्रथम, सान्वी जैन द्वितीय और अविका जैन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं चंद्रोदय तीर्थ पर युवाओं ने नित्यनियम अभिषेक पूजन के बाद समाधिस्थ आचार्य विमल सागर, मुनि क्षमा सागर और मुनि तरुण सागर को अर्घ्य समर्पित किए। इस मौके पर अरुण जैन, वरुण जैन, सचिन जैन, सौरभ जैन सर्वज्ञ, अनूप जैन, मयंक जैन मौजूद रहे।
गुदरी के नेमिनाथ की महिमा अपरंपार
झांसी। महानगर के गुदरी स्थित नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजित नेमिनाथ भगवान की महिमा अपरंपार है। यहां भक्तों के दुख दूर होते हैं। बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण वर्ष 1926 में प्यारीबहू जैन पत्नी स्व. सेठ स्वरूप चंद्र जैन ने कराया। मंदिर में 400 वर्ष प्राचीन भगवान शीतलनाथ, भगवान नेमिनाथ समेत अन्य तीर्थंकरों की प्रतिमाएं स्थापित कराईं गईं। वर्ष 1975 में एक चोर मंदिर से प्रतिमाओं को चोरी कर ले गया। इसकी जानकारी हुई तो समाज की मानबाई जैन पत्नी स्व. धन्नालाल जैन ने अन्न जल का त्याग कर दिया। भगवान का अतिशय हुआ कि चोर को मूर्ति ले जाते वक्त पुलिस ने घासमंडी के पास पकड़ लिया। सुबह समाज के लोग कोतवाली पहुंचे तो मूर्तियां वहां विराजमान थीं। मगर एक मूर्ति गायब थी। समाज के धन्नालाल जैन ने कहा कि शाम तक वो मूर्ति भी मिल जाएगी। शाम तक जहां से चोर को पकड़ा गया था, उस स्थान पर एक युवक को मूर्ति मिल गई। समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई। बाद में प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित कराया गया। महेंद्र जैन ने बताया कि मंदिर में भगवान नेमिनाथ की मूलनायक प्रतिमा है। समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान, विधान होते रहते हैं। साथ ही पर्यूषण पर्व में धर्म प्रभावना होती है। कस्तूरी जैन ने बताया कि यहां विराजित नेमिनाथ भगवान की महिमा अद्भुत है। प्रिया जैन ने कहा कि मंदिर में आकर शांति का अनुभव होता है।
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