फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आकाशीय बिजली गिरने से गई 34 की जान

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। बारिश के मौसम में कुदरत बिजली का कहर झांसी और ललितपुर के ग्रामीण इलाकों में खूब बरपाती है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले तीन साल के दरम्यान आसमान से गिरी बिजली की चपेट में आने से दोनों जिलों में 86 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 200 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से झुलस चुके हैं। जबकि, 103 पशुओं की जिंदगी पर भी कुदरत की ये आफत भारी पड़ी है।
विज्ञापन

आसमान में बादलों के आपस में टकराने से तेज गरज के साथ उच्च शक्ति की बिजली पैदा होती है। इससे हवा में विद्युत प्रवाह गतिमान हो जाता है, जिससे रोशनी की तेज चमक पैदा होती है और विद्युत प्रवाह धरती की ओर अपना रुख करता है। चूंकि, शहरों में जगह-जगह भवनों पर बिजली के प्रवाह को धरती के भीतर ले जाने के लिए ‘तड़ित चालक’ लगे होते हैं। ये एक धातु की छड़ होती है, जिसे ऊंचे भवनों की छत पर लगाया जाता है। इसे तांबे के तार से जोड़कर धरती में गाड़ दिया जाता है। इसके जरिये बिजली धरती में नीचे समा जाती है। लेकिन, गांवों में दूर-दूर तक खुले मैदान और खेत होते हैं। वहां तड़ित चालक की दूर-दूर तक व्यवस्था नहीं होती है। ऐसे में बिजली ग्रामीण इलाकों में ज्यादा कहर बरपाती है।
बारिश से बचने के लिए ज्यादातर लोग पेड़ों के नीचे खड़े हो जाते हैं। जबकि, बिजली ऊंची बनावटों को ही सबसे पहले निशाना बनाती है। ऐसे में लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं। जिले में पिछले तीन साल के दरम्यान बिजली गिरने से झांसी - ललितपुर में 86 लोगों की जान जा चुकी। 2019-20 में 42, 2020-21 में 34 और चालू वर्ष में अब तक बिजली 14 लोगों की जान ले चुकी हैं। जबकि, इस वर्ष अब तक बारिश ढंग से शुरू भी नहीं हुई है।
विज्ञापन

पेड़ के नीचे न हों खड़े, उकड़ू बैठकर बचाएं जान
झांसी। बारिश के साथ बादल गरज रहे हों, तो बचने के लिए कतई पेड़ के नीचे खड़े न हों। पेड़ों की ऊंचाई अधिक होने की वजह से बिजली इन पर गिर जाती है और इससे उसके नीचे खड़े लोग भी चपेट में आ जाते हैं। भरारी कृषि मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. मुकेश चंद्र ने बताया कि बिजली तड़कने की स्थिति खुले आकाश के नीचे बचाव का जब कोई साधन न मिले, तो पैरों के बल बैठ जाएं। अपने हाथ घुटनों पर रख लें और सिर घुटनों के बीच। इस मुद्रा में जमीन से कम संपर्क रहता है। इसके अलावा पानी के पास कतई खड़े न हों। झुंड में हों तो आपस में बंट जाएं। बिजली के खंभे, छाता या सरिया जैसी चीजों से दूर रहें, इन पर बिजली गिरने की सर्वाधिक संभावना रहती है।
चार लाख मिलता है मुआवजा
झांसी। बिजली की चपेट में आने से मौत होने पर प्रशासन द्वारा चार लाख रुपये की सहायता राशि दिवंगत के परिजनों को उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए पोस्टमार्टम होना जरूरी होता है। इसके अलावा भैंस के मरने पर 30 हजार और बकरी की मौत का मुआवजा तीन हजार रुपये दिया जाता है। झुलसने वालों को एक सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहने पर न्यूनतम 4300 रुपये दिए जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें