झांसी। तली-भुनी चीजों के खानपान के बढ़ते चलन और अनियमित दिनचर्या के चलते लोगों को लिवर की बीमारियां खूब घेर रही हैं। झांसी-ललितपुर में लिवर के 50 हजार से भी ज्यादा मरीज हैं। इसके बावजूद, मेडिकल कॉलेज में गैस्ट्रोएंटोरोलॉजी विभाग नहीं है। मरीजों को दिल्ली, लखनऊ की दौड़ लगानी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना के समय गैस्ट्रोएंटोरोलॉजी विभाग शुरू करने का प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया। तब से अब तक तीन दशक से भी ज्यादा समय हो चुका है, मगर विभाग खोलने की किसी ने पहल नहीं की। जबकि, लिवर के मरीजों के संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पीलिया लिवर का मुख्य रोग होता है। इसके अलावा लिवर कैंसर, हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस, फैटी लिवर, लिवर में सूजन, सिरोसिस को मिलाकर झांसी-ललितपुर में 50 हजार मरीज हैं। फिलहाल मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के चिकित्सक लिवर रोगियों का इलाज कर रहे हैं। बताया गया कि हर महीने मेडिसिन विभाग की ओपीडी में 300-400 लिवर रोगी इलाज कराने के लिए आते हैं। जबकि, 50-60 मरीज भर्ती होते हैं। मगर जब कोई मामला गंभीर हो जाता है तो उन्हें दिल्ली, लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। कई मरीज खुद ही दूसरे शहरों के अस्पतालों में इलाज के लिए चले जाते हैं।
एंडोस्कोपी जांच की है सुविधा
लिवर के रोगों की जांच के लिए एंडोस्कोपी मशीन की जरूरत पड़ती है। मशीन से पेट से जुड़ी कई बीमारियों जैसे कि अल्सर, कैंसर, खून की उल्टी होने की वजह, मेलिना, छाती-पेट में दर्द, भोजन का नहीं पचना आदि की जांच की जाती है। इसके बाद रोग स्पष्ट होने से उपचार शुरू करने में सुविधा होती है।
लिवर रोग के कारण
- कब्ज।
- संक्रमण।
- डायबिटीज।
- अनुवांशिकता।
- अधिक शराब का सेवन।
- अत्यधिक मोटापा।
लिवर बीमारी के लक्षण
- कमजोरी महसूस करना।
- आंखें पीली होना।
- थकान महसूस करना।
- पेट में दर्द होना।
- टखने में दर्द, सूजन आना।
- त्वचा खुजली होना।
- उल्टी व मलती आना।
- त्वचा का सफेद होना।
मेडिकल कॉलेज में अभी गैस्ट्रोएंटोरोलॉजी विभाग नहीं है। मगर मेडिसिन विभाग के डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं। विभाग खोलने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। - डॉ. अंशुल जैन, उप प्राचार्य।