झांसी। कोरोना की तीसरी लहर के दौरान पैरोल पर छोड़े गए कुल 54 सजायाफ्ता कैदियों में 29 अब ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। इनके घरों पर भी पुलिस टीम को ताला लगा मिला। जबकि कई ऐसे भी हैं जिन्होंने जो पता बताया था वह ही गलत निकला। बंदी रक्षकों ने इसकी रिपोर्ट जेल अधीक्षक को दे दी है। अब इनकी तलाश के लिए पुलिस की मदद ली जा रही है। पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
मौजूदा समय में जिला कारागार में करीब 1300 बंदी हैं। जबकि कारागार की क्षमता 500 की है। बंदियों के बोझ से जेल हांफ रही हैं। तीसरी लहर के दौरान जेल में भी तमाम बंदी संक्रमण की चपेट में आ गए थे। शासन ने जेल में बंदियों की संख्या कम करने के लिए कैदियों को पैरोल पर छोड़ने का फैसला किया था। 2 दिसंबर 2021 को झांसी से 54 कैदियों को 60 एवं 90 दिन की विशेष पैरोल पर छोड़ा गया था। मार्च में कोरोना की लहर मंद पड़ने पर 14 मार्च को यह पैरोल खत्म कर दी गई। सभी को कहा गया कि वह 15 मार्च तक जेल में हाजिर हो जाएं। लेकिन समय सीमा खत्म होने के बाद भी 29 बंदी लौटकर नहीं आए। इसके बाद जेल प्रशासन ने तलाश शुरू कराई लेकिन, हैरत की बात रही कि यह बंदी अपने घरों में नहीं मिले। अधिकांश के घरों में ताला बंद है। कुछ के परिजनों ने बंदियों के घर आने से ही अनभिज्ञता जताई। बंदियों ने फोन नंबर भी सही नहीं बताए थे। अब इन बंदियों को तलाशने में जेल प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। जेल प्रशासन अब पुलिस की मदद से इनकी तलाश में जुटा है।
जो बंदी वापस नहीं लौटे उनकी तलाश कराई जा रही है। इस संबंध में पुलिस को भी सूचना दी गई है। स्थानीय थानों के माध्यम से इनकी तलाश हो रही है। कोशिश की जा रही कि सभी बंदी जल्दी वापस लौट आएं
रंग बहादुर पटेल, वरिष्ठ जेल अधीक्षक