झांसी। जिले के 100 साल से अधिक पुराने 24 वृक्षों को ‘हेरीटेज ट्री’ घोषित किया जाएगा। वन विभाग की ओर से ये वृक्ष चिह्नित कर लिए गए हैं। इनमें 12 पीपल, 10 बरगद और एक - एक पेड़ इमली और कटवर का है। वन विभाग इन वृक्षों के रखरखाव की विशेष व्यवस्था करेगा।
वन विभाग ने वन क्षेत्र व गैर वन क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों, नहरों, तालाबों, मार्गों के किनारे तथा ऐतिहासिक धरोहरों के परिसरों में लगे अत्यंत प्राचीन एवं विलुप्त होती प्रजातियों के वृक्षों को हेरीटेज (विरासत) ट्री की श्रेणी में रखा है। न्यूनतम सौ वर्ष से अधिक पुराने वृक्षों को इस श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा वृक्ष का सामुदायिक भूमि पर होना जरूरी है। भूमि संबंधी विवाद के स्थानों पर स्थित वृक्षों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। जिले में ऐसे 24 वृक्षों को चिह्नित कर लिया गया है। बबीना में पांच, मऊरानीपुर में आठ, गुरसराय में आठ और बामौर में तीन वृक्ष चिह्नित किए गए हैं। इसका प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेज दिया गया है। मुख्यालय की हरी झंडी मिलते ही इन वृक्षों के विशेष रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी।
यहां हैं ये वृक्ष
झांसी। हेरीटेज ट्री के लिए चिह्नित किए गए 24 वृक्ष जिले के अलग-अलग स्थानों में हैं। ये बबीना के सुकवां, पृथ्वीपुरा, मऊरानीपुर के खिसकी खुर्द वन ब्लॉक, पड़ाव के हनुमान मंदिर, कटेरा पुराने तालाब के पास, बांध कटेरा के पास, चकारा ग्राम व टीकमगढ़ रोड अग्रसेन डिग्री कॉलेज के पास, गुरसराय के दुर्गा माता मंदिर के पास जसवंतपुरा, पुराना पुरा गांव, जूनियर हाईस्कूल के पास खड़ौरा, हरदौल बाबा का चबूतरा कटरा बाजार, श्री कल्याण बाल विद्या मंदिर कटरा बाजार तथा बामौर में हनुमान जी का मंदिर शमशेरपुरा व चकाडोरी आश्रम ककरबई में स्थित हैं।
सौ साल से अधिक पुराने वृक्षों को हेरीटेज ट्री घोषित किया जाना है। जिले में ऐसे वृक्ष चिह्नित कर लिए गए हैं। वैसे तो वन विभाग सभी वृक्षों को संरक्षित करने का काम कर रहा है। हेरीटेज ट्री के विशेष रखारखाव की व्यवस्था होगी।
- वीके मिश्रा, जिला वन अधिकारी