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23 वन रक्षक, 5 राइफल... ट्रेनिंग के बाद से आज तक किसी ने नहीं फोड़ा कारतूस

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झांसी। बेशकीमती लकड़ी का बड़ा सेंटर माना जाता है झांसी का जंगल। सागौन, खैर, महुवा और शीशम के सर्वाधिक पेड़ हैं। वन तस्कर यहां से कीमती लकड़ी का खूब कटान करते हैं। लेकिन इसके बाद भी वन रक्षकों को मजबूत नहीं किया जा रहा है। झांसी रेंज में 23 वन रक्षक हैं और राइफल केवल 5 हैं। खास बात यह है कि पांच साल पहले वन रक्षकों को जो कारतूस मिले थे आज भी वह सुरक्षित हैं। एक भी कारतूस नहीं फोड़ा गया है।
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अगर झांसी जनपद की बात की जाए तो यहां 304.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में घना जंगल फैला हुआ है। इन जंगलों में कंजी, ढाक, चिरौल, सागौन, शीशम, शहजन, पीपल, पाकड़, बरगद सहित कई बेशकीमती लकड़ियों के पेड़ लगे हुए हैं। इन पर वन माफियाओं की निगाहें हर समय लगी रहती हैं। पेड़ों की निगरानी करने के लिए जिले में मऊरानीपुर, चिरगांव, बबीना, गुरसराय, मोंठ, बामौर व झांसी में कुल सात रेंज बनाई गईं हैं। प्रत्येक रेंज में रेंजरों के साथ ही डिप्टी रेंजर व वन रक्षकों की तैनाती की गई है। वनों की रक्षा के लिए मऊरानीपुर में तीन बंदूकें, चिरगांव, बबीना, बामौर एवं झांसी में एक-एक बंदूकें दी गई हैं। वहीं गुरसराय व मोंठ की बंदूकें खराब होने के कारण स्टोर में जमा करा दी गईं हैं। इन पुरानी ढर्रे की बंदूकों का दौर खत्म होने के बाद भी वन कर्मियों को आधुनिक हथियार नहीं दिए जा रहे हैं। कई बार ऐसा भी हुआ कि वन माफियाओं से सामना होते ही पुरानी राइफलें चलती ही नहीं हैं ऐसे में वन कर्मियों ने इन बंदूकों पर भरोसा करना ही छोड़ दिया है। जिसके चलते पांच साल पहले दिए गए कारतूस अब तक यथा स्थिति में रखे हुए हैं।
प्रभागीय वन अधिकारी वीके मिश्रा ने बताया कि आधुनिक हथियारों के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। शासन स्तर पर आयोजित बैठकों में हथियारों के मुद्दे को उठाया जा चुका है। जल्द ही आधुनिक हथियार मिलने की संभावना है।
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रेंजों को पांच साल पहले दिए गए कारतूसों की स्थिति
मऊरानीपुर 30
झांसी 30
बामौर 30
चिरगांव 30
बबीना 28
झांसी के जंगलों पर लगी रहती 13 माफियाओं की निगाह
झांसी। वन विभाग ने झांसी जनपद में 13 माफियाओं को सूचीबद्ध किया है। इनमें झांसी के साथ ही मध्यप्रदेश के जनपदों के भी माफिया हैं। यह लोग लकड़ी का कटान करने दूसरे जिलों में बेच देते हैं। वन विभाग द्वारा कई दफा कटे पेड़ बरामद किए हैं। वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह सभी माफिया अत्याधुनिक असलहों से लैस होते हैं।
तेंदू पत्ते की भी बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी
झांसी। बुंदेलखंड के जंगलों में बड़ी पैमाने पर तेंदू पत्ता होता है। तेंदू पत्ते का प्रयोग बीड़ी बनाने में किया जाता है। झांसी, ललितपुर, चित्रकूट में सर्वाधिक तेंदू पत्ता होता है। इन पत्तों की तस्करी भी कई राज्यों में की जा रही है। रात के समय पत्ता तोड़ा जाता है। माफिया गरीब और आदिवासी परिवारों को लगाकर पत्ते की तस्करी कराते हैं।
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