ओलन्दगंज में एकादशी पर्व की पूर्व संध्या पर गन्ने की खरीदारी करते लोग। संवाद
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जौनपुर। देवोत्थान एकादशी के मद्देनजर बाजार में पूजन सामग्री बिकने लगे हैं। जगह-जगह गन्ने व सिंघाड़ा बिक रहे हैं। व्रत रखने वाली महिलाएं घरों में साफ-सफाई करने में जुटीं रहीं। महिलाएं चौक बनाकर जहां भगवान विष्णु की पूजा करेंगी वहीं, किसान गन्ने की पूजा करेंगे। इसके बाद उसकी पेराई शुरू होगी। कार्तिक शुक्ला एकादशी को भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं। इसीलिए इस दिन से सारे मांगलिक कार्यों का शुभारंभ भी होता है। इस एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है, जिसे हरि प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। इस वर्ष इस व्रत पर्व का सुखद संयोग 15 नवंबर सोमवार को है।
ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ शैलेश मोदनवाल बताते हैं कि नारद पुराण के उत्तर भाग में एकादशी व्रत महत्व के विषय में कहा गया है कि एकादशी व्रत करने वाला पुरुष मातृकुल, पितृकुल तथा पत्नीकुल की दस-दस पीढ़ियों का उद्धार कर देता है। एकादशी व्रत स्वर्ग और मोक्ष देने वाली है। एकादशी व्रत को करने वाला सब पापों से मुक्त हो भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त करता है। पंडित देवी प्रसाद मिश्र बताते हैं कि इस दिन घर आंगन को चौक पूरकर सजाया जाता है। भगवान के श्री चरणों को अंकित किया जाता है, उनकी विभिन्न प्रकार के पत्रों, पुष्पों, धूप दीप आदि समर्पित कर पूजन किया जाता है तथा व्रत की कथा सुनी जाती है। इस दिन गन्ने का पूजन कर भगवान को अर्पित किया जाता है, उसके पश्चात गन्ने को चूस कर उसके रस को भी ग्रहण किया जाता है।
विष्णु पूजन में तुलसी है विशेष-
पंडित दीपक मिश्रा बताते हैं कि कार्तिक मास में तुलसी वृक्ष का पूजन तो विशेष फल को देती है, जो मनुष्य इस पावन मास में तुलसी के पत्तों तथा मंजरी से भगवान विष्णु का पूजन करता है, उसे दस हजार गाय दान करने तथा सैकड़ों वाजपेय यज्ञ करने के समान फल की प्राप्ति होती है। जो भगवान को तुलसी काष्ठ की धूप देता वह उसके फलस्वरूप सौ यज्ञ अनुष्ठान तथा सौ गोदान का पुण्य फल प्राप्त करता है।
ओलन्दगंज में एकादशी पर्व की पूर्व संध्या पर सिंघाडे व व कन्ना की खरीदारी करते लोग। संवाद- फोटो : JAUNPUR