हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी राम अवध (70) का बृहस्पतिवार को निधन हो गया। परिजन उनके शव को लेकर मंदिर पहुंचे। परिसर में ही अंतिम संस्कार करने की जानकारी मिलने पर कई गांवों के लोग पहुंचकर विरोध करने लगे। तनाव को देखते हुए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल और सीओ सदर रणविजय सिंह भी पहुंच गए, जिन्होंने किसी तरह दोनों पक्षों को समझाबुझाकर शांत कराया।
सद्दोपुर गांव निवासी रामअवध लंबे समय से हनुमानगढ़ी मंदिर में पुजारी के तौर पर देखभाल कर रहे थे। सांस फूलने की लंबी बीमारी के चलते एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान बुधवार की रात साढ़े तीन बजे निधन हो गया। परिजन शव लेकर बृहस्पतिवार को मंदिर परिसर में आ गए। परिसर में ही अंतिम संस्कार करने के लिए चिता तैयार करने की सुगबुगाहट होते ही बक्शा, चुरावनपुर, लखनीपुर, गोपालापुर, भिवरहा,कौली आदि गांव के सैकड़ों लोग पहुंच गए। ग्रामीणों ने मंदिर में शव जलाने की नई परंपरा का विरोध जताया। लोगों का कहना था कि जानबूझकर कुछ लोग विवाद खड़ा कर रहे हैं। सूचना पर पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व सीओ सदर भारी पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। परिजनों से बातचीत के बाद मंदिर से सटे पुजारी के परिवार के पुश्तैनी खेत में अंत्येष्टि करने पर सहमति बनी। इस संबंध में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का कहना है कि समझाबुझाकर मामला शांत करा दिया गया।