काबुल में फंसे मयंक रविवार सुबह अपने घर पहुंचे। बेटे को सही सलामत देख स्वजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े तो दोनों बहनों आकांक्षा और अपूर्वा सिंह के लिए तो ये रक्षाबंधन का सबसे बड़ा उपहार था। भाई के काबुल में फं से होने की खबर से दोनों बहनों की जान सांसत में फंसी हुई थी। पिछले दो साल से भाई को खुद राखी न बांध पाने की कसक दोनों बहनों ने इस बार के वहां से सकुशल लौट आने पर तुरंत मिटाई । घर पहुंच कर भाई को रक्षा सूत्र बांधा।
लाइन बाजार थाना क्षेत्र से कचगांव रोड पर पांच किमी दूर गोधना गांव है। यहां के सत्य प्रकाश सिंह के बेटे मयंक कुमार सिंह काबुल एयरपोर्ट से दो किमी दूर स्थित खान स्टील लिमिटेड कंपनी में महाप्रबंधक हैं। वे तकरीबन चार वर्षों से वहां कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास से वतन वापसी का मौका देने पर वह भी एयर फोर्स के सी-17 विमान से लौटे भारतीयों के साथ दिल्ली आ गए। जिसके बाद सुहेलदेव एक्सप्रेस से सोमवार की सुबह अपने घर पहुंच गए। जहां उन्हें देख पिता सत्य प्रकाश सिंह, पत्नी आंचल, इकलौते बेटा आदित्य, भाई शशांक, हिमांशु, मां सहित गांव और रिश्तेदार भावुक हो उठे। वहीं, समाजवादी छात्र सभा के जिलाध्यक्ष रजनीश मिश्रा ने गोधना आवास पर पहुंचकर मयंक सिंह का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। इस दौरान शिवा यादव, अंकुश यादव , विनोद शर्मा, विकास ,अवनीश यादव, रणजीत सिंह राहुल ,रोहित, विशाल रहे।