विकास कार्यों में लापरवाही देखनी है तो पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण कर लीजिए। जहां परिसर में अधूरे पड़े भवन अधिकारियों की लापरवाही की कहानी कह रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर में प्रस्तावित 117 परियोजनाएं लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। इनमें से कुछ परियोजनाएं तो 15 साल से अधिक समय से अधूरी पड़ी हुई हैं। हालांकि अब शासन को ऐसे अधूरी पड़ी परियोजनाओं की याद आई है। शासन स्तर से विश्वविद्यालय परिसर में अधूरे पड़े सभी परियोजनाओं की जानकारी मांगी गई है।
फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी ने वर्ष 2002 में अपने पिता कैफी आजमी के नाम पर विश्वविद्यालय में कैफी संचार भवन बनाने की पहल की थी। इसके लिए उन्होंने 70 लाख रुपये भी विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराया था। आज तक कैफी संचार भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। इसके चलते इस भवन में पूर्वांचल विश्वविद्यालय में संचालित पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग स्थानांतरित नहीं हो सका है। अब इस परियोजना की लागत भी बढ़ गई है। इसी तरह आडिटोरियम, खेल मैदान समेत करीब 117 परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। इनमें से ज्यादातर कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम और एनसीसीएफ (भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ) के निर्माण कार्य ही अधूरे पड़े हैं। राजकीय निर्माण निगम के 46 और एनसीसीएफ को 71 कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। जिनकी लागत भी अब बढ़ चुकी है। कई कार्य ऐसे भी हैं जो अभी तक हैंडओवर नहीं किए गए हैं और निर्मित भवन जर्जर भी हो चुके हैं। हालांकि अब 15 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद शासन को ऐसी परियोजनाओं की याद आई है। एक दिन पहले विशेष सचिव उच्च शिक्षा मनोज कुमार के नेतृत्व में विवि परिसर में हुए विकास कार्यों की जांच शुरू हुई है। शासन यह जानकारी एकत्र कर रहा है कि विवि प्रशासन ने कार्यों को पूरा कराने के लिए पहल नहीं की अथवा कार्यदायी संस्थाओं ने जानबूझ कर काम पूरा नहीं किया। जांच टीम में विशेष सचिव उच्च शिक्षा मनोज कुमार के अलावा वित्त अधिकारी प्रयागराज शशिभूषण सिंह तोमर, पूविवि के वित्त अधिकारी संजय राय और विवि के रजिस्ट्रार महेंद्र कुमार शामिल रहे। विवि की जांच कर रही चार सदस्यीय जांच टीम अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी।